योग से शारीरिक विकारों की रोकथाम सम्भव : डॉ जीएस तोमर
--राष्ट्र निर्माण का आधार स्वस्थ नागरिक : प्रोफेसर सत्यकाम
--मुविवि में आयोजित व्याख्यानमाला
प्रयागराज, 17 जून (हि.स)। उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में केंद्र सरकार के 12 साल बेमिसाल कार्यक्रम श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित व्याख्यानमाला के अंतर्गत बुधवार को वन अर्थ, वन हेल्थ विषय पर चतुर्थ व्याख्यान का आयोजन किया गया। डॉ जीएस तोमर ने योगाभ्यास को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि नियमित योग से अनेक शारीरिक विकारों की रोकथाम सम्भव है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ गिरेंद्र सिंह तोमर, विजिटिंग प्रोफेसर, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन उद्बोधन में कहा कि मानव स्वास्थ्य प्रकृति के स्वास्थ्य से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। जल, जंगल, जमीन और जीव- जंतुओं के स्वस्थ एवं संरक्षित रहने पर ही समाज स्वस्थ रह सकता है। उन्होंने कहा कि यदि पृथ्वी प्रदूषण, असंतुलन और कुपोषण से ग्रस्त होगी तो मानव जीवन भी सुखी और निरोगी नहीं रह पाएगा। उन्होंने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 के मंच से वन अर्थ, वन हेल्थ का संदेश देकर विश्व समुदाय को समेकित स्वास्थ्य की दिशा प्रदान की।
डॉ तोमर ने भारतीय ज्ञान परम्परा, वेद, उपनिषद तथा आयुर्वेद के उदाहरणों के माध्यम से निरोगी जीवन के सूत्र प्रस्तुत करते हुए आहार, विहार, आचार एवं औषधि को स्वस्थ जीवन का आधार बताया। उन्होंने संतुलित एवं समयानुकूल भोजन, मोटे अनाज (मिलेट्स) के उपयोग, फास्ट फूड के सीमित सेवन तथा भारतीय जीवन पद्धति को अपनाने पर बल दिया।
उन्होंने वृक्षारोपण के साथ-साथ वृक्ष संरक्षण को भी अत्यंत आवश्यक बताते हुए वैदिक वचनों का उल्लेख किया और कहा कि भारतीय संस्कृति में एक वृक्ष को दस पुत्रों के समान महत्व दिया गया है। उन्होंने डिजिटल हेल्थ, स्मार्ट फार्मा, आयुर्वेद तथा विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। स्वस्थ जीवन के लिए प्रातःकाल सूर्याेदय से पूर्व जागने, ताम्रपात्र में जल ग्रहण करने तथा सूर्यास्त से पूर्व भोजन करने की उपयोगिता को भी उन्होंने रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं सामाजिक विकास के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि वन अर्थ, वन हेल्थ की अवधारणा वर्तमान समय की अत्यंत प्रासंगिक पहल है, जो मानव और प्रकृति के मध्य संतुलित संबंध स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करती है। प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का आधार स्वस्थ नागरिक होते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ समाज से ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होगा। उन्होंने युवाओं से योग, संतुलित आहार, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण तथा भारतीय जीवन मूल्यों को अपनाने का आह्वान करते हुए विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया।
जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि नोडल अधिकारी प्रो संजय सिंह ने अतिथियों का वाचिक स्वागत एवं विषय प्रवर्तन किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ सुनील कुमार एवं प्रो आनन्दानंद त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र