गन्ने की छह माह में तैयार होने वाली प्रजातियां विकसित की जाएं : लक्ष्मी नारायण चौधरी
लखनऊ, 16 जुलाई (हि.स.)। प्रदेश के गन्ना विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने वैज्ञानिकों से विशेष अनुसंधान करने का आग्रह करते हुए कहा कि मात्र 06 महीने में तैयार होने वाली गन्ने की प्रजातियां विकसित की जाएं। कहा कि कीटों और गंभीर बीमारियों के प्रति टिकाऊ प्रतिरोधी क्षमता वाली किस्में बनाई जाएं। उन्होंने किसानों से कंपोस्ट और जैविक खादों के अधिकाधिक उपयोग की अपील की। वह गुरुवार काे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के 98वें स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
गन्ना मंत्री ने कहा कि प्रदेश के लाखों किसानों की आजीविका गन्ना खेती पर आधारित है। पिछले वर्षों में प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों तथा किसानों की मेहनत के परिणामस्वरूप गन्ना उत्पादन एवं उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।
अपने संबोधन में राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने कहा कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रत्यक्ष लाभ किसानों तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
मंत्री ने कहा कि किसानों तक अधिक उपज एवं रोग प्रतिरोधी गन्ना किस्मों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। गन्ने के साथ दलहन एवं तिलहन फसलों की सहफसली खेती को प्रोत्साहित किया जाए, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो तथा भूमि की उर्वरता भी बनी रहे। गन्ना समितियों के सहयोग से गन्ना खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा देते हुए आधुनिक कृषि उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
संस्थान के निदेशक ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता को 115 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाना है। एस0एन0 सुशील ने कहा कि उन्नत उत्पादन हेतु अनुसूचित जाति - उप योजना के अन्तर्गत किसानों को एक दिवसीय प्रशिक्षण के साथ ही कृषि सामग्री भी उपलब्ध कराई गयी।
इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर डाॅ0 दिनेश, नोडल अधिकारी आर0आर0 वर्मा सहित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के निदेशक एस0 एन0 सुशील के अतिरिक्त बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। इस अवसर पर किसानों को मंत्री ने कृषि सामग्री भी वितरित की।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन