साइबर स्पेस के साथ कानून को भी लचीला बनाना होगा : प्रो. अतुल कुमार पांडेय

 


कानपुर, 17 अप्रैल (हि.स.)। साइबर स्पेस लगातार विकसित हो रहा है, इसलिए कानून को भी तकनीक के अनुरूप लचीला बनाना जरूरी है। बदलते डिजिटल माहौल में प्रभावी साइबर सुरक्षा के लिए कानून को समय के साथ ढालना होगा। यह बातें शुक्रवार को प्रो. अतुल कुमार पांडेय ने कही।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज में “साइबर सुरक्षा, विधि एवं अभिशासन” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। तात्या टोपे सीनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें देश-विदेश के विधि विशेषज्ञ, शिक्षाविद और शोधार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की संयोजक एवं निदेशक डॉ. स्मृति रॉय ने स्वागत उद्बोधन में तकनीक और विधि के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान समय में रियल टाइम लॉ मेकिंग की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। सहायक निदेशक डॉ. दिव्यांश शुक्ला ने विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी दी।

सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा और कानून के अलग-अलग पहलुओं पर अपने विचार रखे। वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. पवन दुग्गल ने भारत में समर्पित साइबर सुरक्षा कानून की आवश्यकता बताई, जबकि डॉ. निवेदिता चौधरी ने इसे संवैधानिक और सामाजिक चुनौती से जोड़ते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नियंत्रण के बीच संतुलन पर बल दिया।

आईआईटी कानपुर से जुड़े डॉ. आनंद हांडा ने महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की सुरक्षा में तकनीकी शोध की भूमिका को रेखांकित किया। अन्य वक्ताओं ने डिजिटल फॉरेंसिक, साइबर अपराध नियंत्रण, वैश्विक सहयोग और युवाओं में डिजिटल नैतिकता जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम के दौरान प्रो. संदीप त्रिपाठी ने विज्ञान को दोधारी तलवार बताते हुए इसके सही उपयोग के लिए प्रभावी कानून और सुदृढ़ शासन व्यवस्था की आवश्यकता बताई। अंत में सह-संयोजक सुश्री विधि कटियार ने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

सम्मेलन में बड़ी संख्या में संकाय सदस्य, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन साइबर सुरक्षा, विधि और अभिशासन के क्षेत्र में समकालीन मुद्दों पर गंभीर विमर्श का प्रभावी मंच बन रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप