‘लौटेंगे हम एक दिन’ का विमोचन, साहित्यकारों ने सराही प्रो. शिव शरण दास की रचनाधर्मिता
जिनके पास भाषा है, उन्हें मौन नहीं रहना चाहिए : प्रो. चितरंजन मिश्र
गोरखपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। वरिष्ठ शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, साहित्यकार एवं समाजसेवी प्रो. शिव शरण दास की नवीन काव्य-कृति ‘लौटेंगे हम एक दिन’ का सोमवार को सिविल लाइन्स स्थित गोकुल अतिथि भवन में विमोचन हुआ। युवा चेतना समिति, गोरखपुर की ओर से आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) पूनम टंडन ने अन्य अतिथियों के साथ पुस्तक का विमोचन किया। गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं किसान पीजी कॉलेज, सेवरही के पूर्व प्राचार्य डॉ. वेद प्रकाश पाण्डेय ने की।
विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ साहित्यकार रणविजय सिंह, प्रो. चितरंजन मिश्र, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, पुष्पदंत जैन, ज्योति प्रकाश मस्कारा और प्रो. आमोद कुमार राय शामिल रहे। समिति के अध्यक्ष मान्धाता सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं और वैचारिक चेतना को पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। प्रो. दास की कृति वैज्ञानिक चिंतन और साहित्यिक संवेदना का सुंदर समन्वय है तथा जीवन के प्रति विश्वास जगाती है।
प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने कृति को लोकमंगल और सामाजिक दायित्व की भावना से अनुप्राणित बताया। प्रो. चितरंजन मिश्र ने कहा कि जिनके पास भाषा है, उन्हें मौन नहीं रहना चाहिए। रणविजय सिंह ने कहा कि संग्रह में अपने समय और समाज की धड़कन सुनाई देती है। पुष्पदंत जैन ने इसकी सहज भाषा, मानवीय संवेदना और आशावादी स्वर की सराहना की। ज्योति प्रकाश मस्कारा और प्रो. आमोद कुमार राय ने प्रो. दास की साहित्यिक यात्रा को महत्वपूर्ण बताया। अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. वेद प्रकाश पाण्डेय ने कहा कि कृति में अनुभव की परिपक्वता, जीवन के प्रति आस्था और सामाजिक चेतना का प्रभावी समन्वय है।
प्रो. शिव शरण दास ने कहा कि ‘लौटेंगे हम एक दिन’ उनका दूसरा काव्य-संग्रह है। साहित्य उनके लिए सामाजिक कुरीतियों, भ्रष्टाचार और आडंबर के विरुद्ध अभिव्यक्ति का भी माध्यम है। उन्होंने बुद्धिजीवियों से समाज और देश के सकारात्मक उत्थान के लिए मुखर रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने अपनी चुनिंदा कविताओं का पाठ भी किया। उन्होंने कृति को स्वरूप देने में सहयोग के लिए पद्मश्री प्रो. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, डॉ. वेद प्रकाश पाण्डेय और उषा अग्रवाल के प्रति आभार जताया।
वक्ताओं ने प्रो. दास की शैक्षणिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि उनके निर्देशन में 14 शोधार्थियों ने शोध पूरा किया, 90 से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित हुए और रसायन विज्ञान पर उनकी आठ पुस्तकें प्रकाशित हैं। विश्वविद्यालय परिसर में 11 हजार से अधिक सागौन एवं नीम के पौधों के रोपण व संरक्षण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
अतिथियों का स्वागत डॉ. विमल कुमार मोदी, मान्धाता सिंह, रामपाल सिंह, डॉ. धर्मव्रत तिवारी, आशुतोष मिश्र, डॉ. आलोक कुमार सिंह, राजेश पाण्डेय, सुधांशु चंद्र, सौरभ सिंह, राहुल दुबे, विनोद प्रकाश पाण्डेय, अखिलेश कुमार ओझा, मनोज कुमार सिंह, विजय आनंद कक्कू, डॉ. एस.पी. सिंह, डॉ. सुधाकर चौहान, डॉ. ए.पी. गुप्ता और मनोज पाण्डेय ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय