नेपाल आपदा के मृतकों की याद में जलाए दीप, गोरखपुर ने दी श्रद्धांजलि
गोरखपुर, 29 अगस्त (हि.स.)। नेपाल में आई भीषण आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में शनिवार को टाउन हॉल स्थित गांधी प्रतिमा के समक्ष शत् संवेदना एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। मानव सेवा संस्थान ‘सेवा’ एवं सामाजिक संगठनों की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रबुद्धजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और आम नागरिकों ने भाग लिया। सभी ने दीप और मोमबत्ती प्रज्ज्वलित कर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी तथा पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।
कार्यक्रम स्थल पर नेपाल आपदा पीड़ितों के सहायतार्थ दान बॉक्स भी रखा गया। उपस्थित लोगों ने अपनी इच्छानुसार स्वैच्छिक सहयोग राशि दान की। आयोजकों ने जनमानस से अपील की कि आपदा की इस घड़ी में नेपाल के पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए अधिक से अधिक लोग आगे आएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग प्रदान करें। इस दौरान लोगों ने मानवता और सेवा का संदेश देते हुए पीड़ितों की मदद के लिए हरसंभव सहयोग का संकल्प लिया।
मनीष द्विवेदी ने कहा कि नेपाल में हुई जनहानि अत्यंत दुखद और मन को व्यथित करने वाली है। दुख की इस घड़ी में हम सभी को पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होकर अपनी संवेदना व्यक्त करनी चाहिए। आज प्रज्ज्वलित किया गया प्रत्येक दीप और मोमबत्ती दिवंगत आत्माओं की स्मृति को समर्पित है। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और उनके परिजनों को इस अपार दुख को सहने की शक्ति दें।
पुरू मयंक त्रिपाठी ने कहा कि आपदा में हुई जनहानि ने पूरी मानवता को झकझोर दिया है। संकट की घड़ी में देश और सीमाओं से ऊपर उठकर एक-दूसरे के साथ खड़ा होना ही मानवता का धर्म है। नेपाल के पीड़ित परिवारों के दुख में गोरखपुर की जनता सहभागी है। श्रद्धा से जलाया गया यह दीप दिवंगतों की स्मृति और पीड़ितों के प्रति हमारी संवेदना का प्रतीक है।
धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि आपदा किसी सीमा में बंधी नहीं होती और उसका दर्द पूरी मानवता का दर्द होता है। नेपाल में अपनों को खोने वाले परिवारों के साथ हमारी संवेदनाएं हैं। ऐसे समय में समाज को पीड़ितों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। यह आयोजन मानवीय एकजुटता का संदेश देता है।
डॉ. राजेश मिश्र ने कहा कि प्राकृतिक आपदा जीवन की अनिश्चितता का एहसास कराने के साथ समाज में सहयोग की भावना को मजबूत करने का अवसर भी देती है। संकट के समय संवेदना के साथ जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना हमारा सामाजिक दायित्व है। नेपाल के पीड़ितों के प्रति गोरखपुर की यह श्रद्धांजलि मानवीय रिश्तों की मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति की कामना की।
शत्रुजीत सिंह ने कहा कि आज का कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं, बल्कि नेपाल के पीड़ित परिवारों के साथ भावनात्मक एकजुटता की अभिव्यक्ति है। दुख की घड़ी में जलाया गया छोटा-सा दीप भी उम्मीद और संवेदना का संदेश देता है। नेपाल के लोगों का दुख हमारा साझा दुख है। सभी को पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
रमेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि नेपाल में हुई जनहानि ने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर दिया है। दिवंगतों की स्मृति में जलाया गया प्रत्येक दीप और मोमबत्ती हमारी सामूहिक श्रद्धा का प्रतीक है। मानवता का धर्म है कि संकट के समय एक-दूसरे का हाथ थामा जाए। गोरखपुर की ओर से नेपाल के पीड़ित परिवारों के लिए संवेदना और प्रार्थना का यह संदेश है।
नवीन पाण्डेय ने कहा कि यह आयोजन किसी औपचारिकता का हिस्सा नहीं, बल्कि सीमाओं से परे मानवीय संवेदना की अभिव्यक्ति है। नेपाल में दिवंगत प्रत्येक व्यक्ति की स्मृति में जलाया गया दीप हमारी सामूहिक पीड़ा और श्रद्धा का प्रतीक है। दुख की घड़ी में एक-दूसरे का हाथ थामना ही सच्ची मानव सेवा है। हमारी प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और पीड़ित परिवारों के जीवन में फिर आशा का प्रकाश लौटे।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने दीप एवं मोमबत्तियां प्रज्ज्वलित कर दिवंगतों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने नेपाल के शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए सहायता के लिए समाज के सभी वर्गों से आगे आने की अपील की।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय