हमीरपुर में बैलगाड़ी से दुल्हन की हुई विदाई
पुरानी परंपरा और सादगी की मिसाल
हमीरपुर, 08 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में आज के चकाचौंध भरे दौर में जहां शादियां बड़े-बड़े होटलों और महंगी गाड़ियों के दिखावे तक सिमट कर रह गई हैं। वहीं हमीरपुर जिले के मुस्करा कस्बे से एक ऐसी तस्वीर रविवार को सामने आई है जिसने न केवल सबका दिल जीत लिया, बल्कि बुंदेलखंड की विलुप्त होती परंपराओं को भी जीवंत कर दिया।
मुस्करा कस्बे के आर.आर. गार्डन में आज रविवार को सरीला के ग्राम पहरा निवासी पूनम यादव और मुस्करा के शिवनी निवासी बालेंद्र कुमार का विवाह संपन्न हुआ। इस शादी की सबसे खास बात इसकी सादगी रही, विदाई के समय जब लोग लग्जरी कारों की उम्मीद कर रहे थे। तब दुल्हन के परिवार ने बैलगाड़ी सजाकर अपनी बेटी को विदा किया। दुल्हन के दादा ने इस फैसले के पीछे की गहराई बताते हुए कहा कि यह शादी पूरी तरह सादगी से और दहेज रहित संपन्न हुई है। आज के दौर में जहां लोग दिखावे में लाखों रुपए पानी की तरह बहा देते हैं। हमने फिजूलखर्ची से बचने और अपनी पुरानी परंपरा को सम्मान देने के लिए बैलगाड़ी से विदाई का निर्णय लिया कि बिना किसी शोर-शराबे और तामझाम के हुई यह विदाई पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह नजारा बुंदेलखंड की उस मिट्टी की याद दिलाता है। जहां संस्कार और अपनों का आशीर्वाद सबसे ऊपर माना जाता है। बैलगाड़ी पर सवार होकर जब बेटी विदा हुई तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भावुक हो गईं। यह पहल समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि खुशियां दिखावे में नहीं, बल्कि परंपराओं को सहेजने और सादगी अपनाने में हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा