कुशीनगर : एक नवंबर को नारायणी रॉकेट्री कप में आएंगे इन-स्पेस चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका
- पांच लॉन्चर से होंगे मॉडल रॉकेट के प्रक्षेपण, ड्रोन से लॉन्च किए जाएंगे 59 कैनसैट
- अंतरिक्ष तकनीक को किसानों, ग्राम पंचायतों और ग्रामीण विकास से जोड़ने पर रहेगा जोर
- पिपराघाट जीरो बंधा पर देशभर की 76 छात्र टीमें दिखाएंगी वैज्ञानिक प्रतिभा
कुशीनगर , 29 अक्टूबर (हि.स.)। तमकुहीराज क्षेत्र के पिपराघाट जीरो बंधा पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के नारायणी रॉकेट्री कप-2026 में एक नवंबर को भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका शामिल होंगे। 31 अक्टूबर से तीन नवंबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में देशभर के विद्यार्थी मॉडल रॉकेट्री और कैनसैट के माध्यम से अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन करेंगे। नारायणी नदी के तट पर होने वाला यह आयोजन पूर्वांचल को अंतरिक्ष विज्ञान, नवाचार और तकनीकी शिक्षा की राष्ट्रीय गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। लॉन्च पैड तक जाने वाली सड़क की मरम्मत के साथ पांच लॉन्चर स्थापित किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों की ओर से तैयार मॉडल रॉकेट के प्रक्षेपण के अलावा ड्रोन के माध्यम से कैनसैट लॉन्च करने की व्यवस्था भी की जा रही है।
नारायणी रॉकेट्री कप में कुल 76 छात्र टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें 28 टीमें मॉडल रॉकेट्री और 48 टीमें कैनसैट श्रेणी की हैं। आयोजन में करीब 608 विद्यार्थियों तथा 150 शिक्षकों और मेंटर्स के शामिल होने का अनुमान है। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों को रॉकेट के डिजाइन, निर्माण, पेलोड, प्रक्षेपण और अंतरिक्ष से जुड़ी तकनीकी प्रक्रियाओं को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिलेगा।
प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाना तथा उन्हें प्रयोगों के माध्यम से सीखने का अवसर उपलब्ध कराना है। मॉडल रॉकेट्री के जरिए छात्र रॉकेट की संरचना, उसकी कार्यप्रणाली और प्रक्षेपण से जुड़ी बुनियादी जानकारियों से परिचित होंगे। वहीं, कैनसैट श्रेणी में छोटे उपग्रह जैसी संरचना तैयार करने और उसके माध्यम से आंकड़े एकत्र करने की तकनीक को समझने का अवसर मिलेगा।
आयोजकों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी आधुनिक विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे भविष्य में विज्ञान, इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में करियर बनाने की उनकी रुचि को प्रोत्साहन मिल सकता है।
प्रतियोगिता स्थल पर मॉडल रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए पांच लॉन्चर लगाए जा रहे हैं। थ्रस्ट टेक इंडिया की टीम लॉन्च पैड पर इन लॉन्चरों को स्थापित करने में जुटी है। तैयारियों के तहत 31 अक्टूबर को ग्राउंड टेस्ट निर्धारित किया गया है। इसके माध्यम से प्रक्षेपण से जुड़ी व्यवस्थाओं और तकनीकी तैयारियों का परीक्षण किया जाएगा।
आयोजन स्थल तक पहुंचने वाले रास्ते की मरम्मत कराई जा रही है, ताकि प्रतिभागियों, तकनीकी टीमों और अतिथियों को आने-जाने में परेशानी न हो। लॉन्च पैड की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ऑब्जर्वेशन प्वाइंट के पास कंट्रोल रूम तैयार किया जा रहा है। इसमें करीब 50 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। बड़ी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से लॉन्च पैड पर होने वाली गतिविधियों को देखा जा सकेगा। जूरी सदस्यों, फैकल्टी और तकनीकी टीमों के लिए भी यहां आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
प्रक्षेपण से जुड़ी तैयारियों में सुरक्षा और तकनीकी निगरानी को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ग्राउंड टेस्ट के बाद आयोजन की आगे की गतिविधियों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संचालित करने की तैयारी है।
इस बार प्रतियोगिता की खास विशेषता कैनसैट का ड्रोन के माध्यम से प्रक्षेपण होगा। कुल 59 कैनसैट लॉन्च किए जाने की तैयारी है। इसके लिए नेशनल एयरोनॉटिकल लैबोरेटरी (एनएएल) की टीम ड्रोन पर कैनसैट की असेंबलिंग करेगी। कैनसैट छोटे उपग्रह जैसी प्रणाली होती है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी सेंसर, पेलोड और आंकड़ों के संग्रह जैसी तकनीकों को समझ सकते हैं।
ड्रोन के माध्यम से कैनसैट लॉन्च करने की व्यवस्था विद्यार्थियों को अंतरिक्ष अभियानों में इस्तेमाल होने वाली कुछ तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराने में मदद करेगी। इससे छात्र केवल किताबों में पढ़ी गई जानकारी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उपकरणों की बनावट, उनकी कार्यप्रणाली और तकनीकी चुनौतियों को भी करीब से देख सकेंगे।
आयोजन की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने के लिए संबंधित तकनीकी टीमें लगातार काम कर रही हैं। कैनसैट की असेंबलिंग, लॉन्च पैड की तैयारी और निगरानी व्यवस्था को प्रतियोगिता के प्रमुख हिस्सों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
आयोजन स्थल के ऑब्जर्वेशन एरिया के पास विशाल जर्मन हैंगर लगाया जा रहा है। इसमें रॉकेट असेंबलिंग, अतिथियों के संबोधन और प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके बगल में पांच पगोडा बनाए जा रहे हैं। इन्हें जूरी सदस्यों, थ्रस्ट टेक इंडिया और प्लेनेटोरियम से जुड़ी टीमों के लिए आरक्षित रखा जाएगा।
प्रवेश द्वार के पास विजिटर गैलरी भी तैयार की जा रही है। इसमें जगदीश पब्लिक स्कूल और द प्रेसिडेंट स्कूल, तमकुही के विद्यार्थी मॉडल रॉकेट और पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाएंगे। इससे स्थानीय विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता और वैज्ञानिक सोच प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। प्रदर्शनी के जरिए दर्शक विज्ञान, तकनीक और कला के आपसी संबंधों को भी समझ सकेंगे।
दर्शकों और आयोजन में शामिल होने वाले लोगों की सुविधा के लिए ऑब्जर्वेशन प्वाइंट से 100 मीटर और 500 मीटर की दूरी पर पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है। कंट्रोल रूम, विजिटर गैलरी, हैंगर और पार्किंग सहित सभी व्यवस्थाओं को निर्धारित समय तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
नारायणी रॉकेट्री कप का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को रॉकेट तकनीक से परिचित कराना नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष से प्राप्त आंकड़ों के व्यावहारिक उपयोग की संभावनाओं को भी सामने लाना है। उपग्रहों से मिलने वाली जानकारियां भविष्य में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े कई कार्यों में उपयोगी हो सकती हैं। फसलों की स्थिति, मौसम, भूमि और प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित आंकड़ों के आधार पर किसानों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
कृषि बीमा के क्षेत्र में भी उपग्रह आधारित जानकारियां फसलों को हुए नुकसान के आकलन और संबंधित प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती हैं। इसी तरह ग्राम पंचायतों को अपने गांवों की स्थिति समझने, विकास कार्यों की योजना तैयार करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में अंतरिक्ष आधारित तकनीक से लाभ मिल सकता है।
हालांकि, इन संभावनाओं को वास्तविक सेवाओं में बदलने के लिए संबंधित तकनीक, उपलब्ध आंकड़ों और उनके इस्तेमाल की जानकारी होना आवश्यक है। आयोजन के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान को आम लोगों की जरूरतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सांसद शशांक मणि त्रिपाठी की दस वर्षीय विकास रणनीति ‘अमृत प्रयास’ के तहत श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन (एसएसडीएफ) के संयोजन में प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इसके माध्यम से शिक्षा, तकनीक, उद्यमिता और जनभागीदारी को बढ़ावा देकर देवरिया लोकसभा क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि एक नवंबर को नारायणी रॉकेट्री कप में इन-स्पेस के चेयरमैन डॉ. पवन गोयनका शामिल होंगे। उनके आने से विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान और रॉकेट तकनीक को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रयास है कि अंतरिक्ष तकनीक का लाभ किसानों और गांवों तक पहुंचे। कृषि बीमा, ग्रामीण क्षेत्रों की निगरानी और विकास संबंधी कार्यों में इसके उपयोग की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जाए।
वहीं, श्रीनारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन के निदेशक मनीष बजाज ने बताया कि प्रतियोगिता में 59 कैनसैट ड्रोन से लॉन्च किए जाएंगे। इसके लिए एनएएल की टीम ड्रोन पर कैनसैट की असेंबलिंग करेगी। 28 मॉडल रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए पांच लॉन्चर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों को अंतरिक्ष तकनीक की व्यावहारिक प्रक्रियाओं को समझने और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।
नारायणी नदी के तट पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम विद्यार्थियों की वैज्ञानिक प्रतिभा को मंच देने के साथ पूर्वांचल में तकनीकी शिक्षा और नवाचार की संभावनाओं को विस्तार देने का प्रयास है।
हिन्दुस्थान समाचार / ज्योति पाठक