सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बाद भी सरल बने रहे रामनाथ कोविंद: केशव प्रसाद मौर्य
लखनऊ, 14 अक्टूबर (हि.स.)। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की पुस्तक के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन सबसे कठिन, जिम्मेदारी भरा और व्यापक पहचान दिलाने वाला क्षेत्र है। इसमें व्यक्ति का पद कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसे अपनी शुचिता बनाए रखनी चाहिए और अहंकार से दूर रहना चाहिए। रामनाथ कोविन्द का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी व्यक्ति अपने मूल विचारों, संस्कारों और सहजता को बनाए रख सकता है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द को वह उस समय से जानते हैं, जब वह राज्यसभा के सदस्य थे और उत्तर प्रदेश भाजपा के महामंत्री के रूप में कार्य कर रहे थे। बिहार के राज्यपाल और देश के राष्ट्रपति के रूप में भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वह अपने गृह नगर कानपुर आए, तब अपने गुरु के चरण स्पर्श कर उन्होंने संस्कारों के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित की। देश के प्रथम नागरिक के पद पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने अपने पुराने साथियों और परिचितों से आत्मीय संबंध बनाए रखे। उनके व्यवहार में पद के कारण कोई दूरी या अहंकार दिखाई नहीं दिया।
पीड़ितों व वंचितों की आवाज बने कोविंद: ब्रजेश पाठक
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द का अभिनंदन करते हुए कहा कि उन्होंने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने के बाद भी अपने सहज एवं सरल स्वभाव को बनाए रखा। गरीबों, पीड़ितों और वंचितों की आवाज उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा रही। समाज में ऐसे बिरले ही व्यक्ति होते हैं, जो वंचित वर्गों की समस्याओं को समझने के साथ उन्हें धरातल पर समाधान तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। रामनाथ कोविन्द ने संसद में रहते हुए लगातार पीड़ितों और वंचितों की आवाज को बुलंद किया। बिहार के राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने अपनी सहजता और कार्यशैली से अमिट छाप छोड़ी। राष्ट्रपति के रूप में देश के लिए किए गए उनके कार्य भारतीय गणतंत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखेंगे। ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ विषय पर गठित समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका भी उल्लेखनीय है।
सदैव जमीन से जुड़े रहे कोविन्द: सतीश महाना
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के व्यक्तित्व और जीवन यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में राष्ट्रपति से बड़ा कोई संवैधानिक पद नहीं है, लेकिन इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी वह सदैव जमीन से जुड़े रहे। उनका जीवन सादगी, विनम्रता, दृढ़ संकल्प और जनसामान्य से आत्मीय जुड़ाव की प्रेरक मिसाल है। उनके साथ जुड़ी अनेक स्मृतियां हैं, जो उनके व्यक्तित्व की सहजता और संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। मैं चाहता हूं कि रामनाथ कोविन्द की पुस्तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के सभी सदस्यों तक पहुंचे, ताकि वे भी उनके जीवन, संघर्ष और अनुभवों से परिचित हो सकें। इसके लिए उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति से विधानसभा सदस्यों के लिए 500 पुस्तकें उपलब्ध कराने का अनुरोध किया और कहा कि पुस्तकों का पूरा मूल्य वह स्वयं देंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन