कसमंडी विवादः लाखन आर्मी ने किले में धर्मांतरण का लगाया आरोप, मौलाना के खिलाफ FIR की मांग

लखनऊ। मलिहाबाद के कसमंडी किला विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। बुधवार को लाखन आर्मी ने मलिहाबाद थाने में शिकायत देकर मौलाना जमील अहमद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि ऐतिहासिक स्थल पर धर्मांतरण की गतिविधियां चलाई जा रही हैं और बिना मान्यता के मदरसा भी संचालित किया जा रहा है। लाखन आर्मी ने मामले में FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
 

लखनऊ। मलिहाबाद के कसमंडी किला विवाद में अब नया मोड़ आ गया है। बुधवार को लाखन आर्मी ने मलिहाबाद थाने में शिकायत देकर मौलाना जमील अहमद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का दावा है कि ऐतिहासिक स्थल पर धर्मांतरण की गतिविधियां चलाई जा रही हैं और बिना मान्यता के मदरसा भी संचालित किया जा रहा है। लाखन आर्मी ने मामले में FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि कसमंडी का यह किला उनके पूर्वज राजा कंस पासी का किला है, जिसे पासी समाज समेत कई हिंदू समुदाय अपनी आस्था और विरासत से जोड़कर देखते हैं। शिकायत के मुताबिक करीब तीन साल पहले बहराइच निवासी मौलाना जमील अहमद वहां रहने लगे। आरोप है कि उन्होंने किले के पुराने हिस्से की सफाई कर वहां नमाज शुरू की और धीरे-धीरे उस जगह को धार्मिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश की।

धर्मांतरण और मदरसा चलाने का आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि किले के पास ही 'सुलेमानिया स्कूल' नाम से बिना मान्यता एक मदरसा चलाया जा रहा है। आरोप है कि यहां बच्चों को पढ़ाने की आड़ में उनका “ब्रेन वॉश” कर धर्मांतरण कराने की कोशिश की जाती है।

लाखन आर्मी का कहना है कि इन गतिविधियों की वजह से इलाके में तनाव और नाराजगी का माहौल है। संगठन ने बिना अनुमति धार्मिक गतिविधियां चलाने, बिना मान्यता संस्थान संचालित करने और धर्मांतरण के आरोपों को कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।

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क्या है पूरा कसमंडी विवाद?
दरअसल, मलिहाबाद का कसमंडी विवाद पिछले कुछ समय से चर्चा में है। यहां एक पुराने किले को लेकर पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच मतभेद बना हुआ है। पासी समाज का दावा है कि यह महाराज कंस पासी का किला है। उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने यहां कब्जा कर लिया है, नमाज पढ़ी जा रही है और कब्रिस्तान बनाए जाने की कोशिश हो रही है।

वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वहां लंबे समय से नमाज पढ़ी जाती रही है और उनके दावे भी पुराने हैं।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने फिलहाल दोनों पक्षों से किले के अंदर और आसपास किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि नहीं करने को कहा है। इससे पहले पासी समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी की थी।

देखें वीडियो  

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