कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां का हाथ काटने के मामले में दो अस्पतालों पर एफआईआर के निर्देश, अब कार्रवाई तय

 


कानपुर, 25 मई (हि.स) कानपुर में आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां का हाथ काटे जाने के मामले में मेडिकल जांच समिति की रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में इलाज में लापरवाही के लिए टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल और बिठूर बैकुंठपुर स्थित पारस हॉस्पिटल दोनों को जिम्मेदार माना गया है। इसके बाद पुलिस आयुक्त ने दोनों अस्पतालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि शुरुआती जांच में जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं हो सकी थी, इसलिए दोबारा मेडिकल टीम गठित की गई। नई जांच में सामने आया कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही और देरी हुई, जिसके कारण मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और अंततः हाथ काटना पड़ा।

यह है पूरा मामला

आईटीबीपी में तैनात कांस्टेबल विकास सिंह मूल रूप से फतेहपुर जिले के रहने वाले हैं और फिलहाल महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में तैनात हैं। उनकी 56 वर्षीय मां निर्मला देवी को सांस लेने में दिक्कत, कब्ज और कमजोरी की शिकायत थी। 13 मई को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आईटीबीपी अस्पताल से उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया।

विकास अपनी मां को एम्बुलेंस से अस्पताल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में भारी ट्रैफिक जाम के कारण उन्होंने उन्हें टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया। वहां ऑक्सीजन सपोर्ट देने के साथ हाथ में कैनुला लगाया गया। विकास का आरोप है कि इसी दौरान गलत इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी मां के हाथ में सूजन बढ़ने लगी और हाथ का रंग बदलने लगा। बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें बिठूर रोड स्थित पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। लेकिन तब तक संक्रमण काफी बढ़ चुका था और चिकित्सकों को अंततः उनका हाथ काटना पड़ा।

मां की हालत से आहत विकास सिंह लगातार कार्रवाई की मांग करते रहे। उनका आरोप था कि शुरुआत में उनकी शिकायत पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। वे कई दिनों तक चौकी, थाना और पुलिस कमिश्नर कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। मामला तब अधिक चर्चा में आया जब वे अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर अधिकारियों के सामने न्याय की मांग करने पहुंचे। सीएमओ की ओर से गठित टीम में कई डॉक्टरों के साथ आईटीबीपी प्रतिनिधि भी शामिल थे। जांच के दौरान दोनों अस्पतालों का निरीक्षण किया गया और संबंधित चिकित्सकों के बयान दर्ज किए गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज को हृदय संबंधी परेशानी भी थी। इलाज के दौरान नसों में रक्त के थक्के बनने से हाथ तक रक्त प्रवाह प्रभावित हुआ। हालांकि समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह नहीं ली गई, जिससे संक्रमण बढ़ता गया और स्थिति गंभीर हो गई। जांच में विकास सिंह के लगाए गए आरोपों को सही पाया गया। इस मामले को लेकर 23 मई को बड़ी संख्या में आईटीबीपी जवान पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इस घटना पर पुलिस कमिश्नर ने नाराजगी व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में जवानों का एक साथ पहुंचना और फॉर्मेशन में खड़े होना अनुशासन से जुड़ा मामला है और इससे गलत संदेश गया। उन्होंने आईटीबीपी महानिदेशक को पत्र लिखकर संबंधित जवानों के व्यवहार पर कार्रवाई की मांग भी की है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप