हिन्दू धर्म संकुचित करने के लिए धर्माचार्य ही जिम्मेदार: महंत राजूदास

 




कन्नौज, 16 मार्च (हि. स.)। मानीमऊ में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान हनुमान गढ़ी अयोध्या के महंत राजूदास ने धर्माचार्यों पर परोक्ष रूप से तंज कसा। उन्होंने हिंदू धर्म के सिमटने पर गहरी चिंता व्यक्त की। इसके लिए उन धर्माचार्यों को जिम्मेदार ठहराया जो मठों से बाहर नहीं निकले।

महंत राजूदास सोमवार दोपहर मानीमऊ गांव पहुंचे, जहां सनातन धर्म सेवा संस्थान की ओर से शुरू होने वाली आनंद जनजागरण यात्रा से पहले उन्होंने ध्वज पूजन किया। मंच से सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज हिंदुस्तान में ही हिंदू सीमित होता जा रहा है, क्योंकि हिंदू अपने धर्म और परम्पराओं को भूलने लगे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग आज भी धर्म को मानते हैं, उनकी संख्या बढ़ रही है। लेकिन जिन हिंदुओं ने धर्म को भुला दिया है, वे सिकुड़ते जा रहे हैं। उन्होंने एक तरफ हिंदुओं की अपने धर्म के प्रति उदासीनता और दूसरी तरफ दो देशों की लड़ाई में हिंदुस्तान में पुतले फूंकने जैसी घटनाओं का जिक्र किया।

महंत राजूदास ने कहा कि हमारा धर्म सीमित होता जा रहा है, इसके पीछे कुछ ऐसे धर्माचार्य हैं जो कभी मठों से बाहर नहीं निकले। उन्होंने ऐसे लोगों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे आराम से बैठे रहते हैं, ऊपर छतरी और पीछे दो चेले पंखा डुला रहे होते हैं। इन लोगों ने खुद को एक गौशाला, एक गुरुकुल और एक विद्यार्थी तक ही सीमित कर लिया है। उन्होंने इस स्थिति के परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यही वजह है कि आज शादी-बारातों में डीजे, दारू और खाने-पीने का इंतजाम तो बेहतर होता है, लेकिन मंत्रोच्चारण करने वाले पंडित जी यदि दक्षिणा मांग लें तो आफत टूट पड़ती है। मंत्र जल्दी पढ़ने का दबाव डाला जाता है, जिससे हमारी परम्पराएं खत्म हो रही हैं। महंत ने इस स्थिति पर चिंता और चिंतन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर पंडित कौशल महाराज, तिर्वा विधायक कैलाश राजपूत, भाजपा जिलाध्यक्ष वीरसिंह भदौरिया सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / संजीव झा