'इत्र नगरी' में आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा, कन्नौज में सहेजी जा रही च्यवन ऋषि की विरासत: जयवीर सिंह
तप, त्याग और आयुर्वेद की भूमि बनेगी पर्यटन आकर्षण का केंद्र, च्यवन ऋषि आश्रम का होने जा रहा सौंदर्यीकरण
उप्र पर्यटन विभाग च्यवन ऋषि आश्रम को संवारने में जुटा, अब आगंतुकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
कन्नौज, 06 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश सरकार आयुर्वेदिक चिकित्सा की महान विभूति और 'च्यवनप्राश' के जनक च्यवन ऋषि के कन्नौज स्थित आश्रम का पर्यटन विकास करने जा रही है। च्यवनऋषि आश्रम भारतीय ऋषि परंपरा, तपस्या एवं आयुर्वेदिक ज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। मान्यताओं के अनुसार, महर्षि च्यवन ने इसी तपोस्थली पर कठोर साधना की थी। पर्यटन विभाग ने च्यवन ऋषि से जुड़ी पौराणिक स्थली के पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास योजना के अंतर्गत जनपद के विधानसभा क्षेत्र छिबरामऊ के विकासखंड गुगरापुर स्थित आश्रम के पर्यटन विकास के लिए 81.35 लाख रुपये की परियोजना को मंजूरी मिली है।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'कन्नौज स्थित च्यवन ऋषि आश्रम, भारतीय ऋषि परंपरा, तपस्या और आयुर्वेदिक ज्ञान की अमूल्य धरोहर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि च्यवन ने यहीं कठोर तपस्या की थी। आयुर्वेद में विशेष स्थान रखने वाले ऋषि च्यवन का नाम आज भी 'च्यवनप्राश' के माध्यम से घर-घर में जाना जाता है, जो स्वस्थ और खुशहाल जीवन का प्रतीक माना जाता है। ऐसे ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व वाले स्थल के पर्यटन विकास से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को विशिष्ट पहचान मिलेगी और श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए आकर्षण बढ़ेगा।'
च्यवन ऋषि आश्रम में बढ़ेंगी पर्यटक सुविधाएं
कन्नौज जनपद स्थित च्यवन ऋषि आश्रम के पर्यटन विकास के लिए पहली किस्त के रूप में 61 लाख रुपये जारी किए गए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा कराए जाने वाले कार्यों की वृहद श्रृंखला अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। आश्रम के निकट बहुउद्देश्यीय हॉल (मल्टीपर्पज हॉल) का निर्माण कराया जाएगा। पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सोलर पैनल लगाए जाएंगे। परिसर में रोशनी के लिए स्ट्रीट लाइट, आगंतुकों के बैठने के लिए आरसीसी बेंच और मार्गदर्शन के लिए साइनेज की व्यवस्था होगी। पर्यटन विभाग का फोकस स्थल पर आगंतुकों के लिए जरूरी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने पर रहेगा।
ऐसे हुआ च्यवनप्राश का आविष्कार
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कन्नौज स्थित च्यवन ऋषि आश्रम वही तपोभूमि है, जहां महर्षि च्यवन ने वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि उनकी तपस्या के दौरान उनके चारों ओर दीमक का विशाल टीला बन गया था और इसी स्थान पर राजकुमारी सुकन्या से जुड़ी प्रसिद्ध कथा घटित हुई। बाद में सुकन्या की सेवा, समर्पण और अश्विनी कुमारों के दिव्य आशीर्वाद से महर्षि च्यवन को पुनः यौवन और दृष्टि प्राप्त हुई। इसके पश्चात उन्होंने आयुर्वेद और मानव स्वास्थ्य के कल्याण के लिए शोध कार्य किया। मान्यता है कि इसी ज्ञान परंपरा से 'च्यवनप्राश' जैसे अमूल्य आयुर्वेदिक योग का उद्भव हुआ, जो आज भी स्वास्थ्य, दीर्घायु और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि च्यवन ऋषि आश्रम भारतीय ऋषि परंपरा, आयुर्वेदिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
'इत्र नगरी' के पर्यटन स्थल कर रहे आकर्षित
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि 'कन्नौज आने वाले पर्यटकों के लिए च्यवन ऋषि आश्रम के साथ-साथ जिले के अन्य प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थल भी विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। इनमें पक्षी प्रेमियों के लिए लाख बहोसी पक्षी अभ्यारण्य, इतिहास और संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने वाला कन्नौज पुरातात्विक संग्रहालय, तिर्वा स्थित माता अन्नपूर्णा मंदिर, गंगा तट पर स्थित रमणीय मेहंदी घाट, श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र स्वयंभू बाबा गौरी शंकर मंदिर तथा ऐतिहासिक महत्व वाले 52 खंभों वाली मकदूम जहानिया प्रमुख हैं। जिले के विभिन्न पर्यटन, धार्मिक और विरासत स्थलों का भ्रमण करने के लिए वर्ष 2025 में 21.73 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे, जो कन्नौज की बढ़ती पर्यटन संभावनाओं और आकर्षण को दर्शाता है।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / संजीव झा