श्रमिक हिंसा के मामले में गिरफ्तार किशोर ने वयस्क कैदियों के साथ गुजारे दो माह, अब मिली आजादी
नोएडा, 18 जून (हि.स.)। श्रमिक आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए 16 वर्षीय किशोर को करीब दो माह तक वयस्क जेल में रखने के बाद बृहस्पतिवार को बाल सुधार गृह से जमानत पर रिहा कर दिया गया। दस्तावेजों की जांच में किशोर के नाबालिग होने की पुष्टि होने पर उसे आठ जून को बाल सुधार गृह भेजा गया था।
जानकारी के अनुसार, कोतवाली फेज-2 पुलिस ने 14 अप्रैल को श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा के आरोप में किशोर को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसे बालिग मानते हुए अदालत में पेश किया और बाद में न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इस दौरान वह करीब दो महीने तक वयस्क आरोपियों के साथ जेल में रहा।
वरिष्ठ अधिवक्ता माणिक गुप्ता ने बताया कि न्यायालय परिसर में किशोर को हथकड़ी में उन्होने देखा और उससे बातचीत की। बातचीत के दौरान किशोर ने खुद को नाबालिग बताया। इसके बाद अधिवक्ता ने उसके आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज जुटाकर अदालत में पेश किए, जिनसे उसकी उम्र 16 वर्ष साबित हुई। अदालत ने दस्तावेजों के आधार पर आठ जून को किशोर को वयस्क जेल से बाल सुधार गृह भेजने का आदेश दिया। इसके साथ ही उसकी जमानत राशि भी 45 हजार रुपये से घटाकर 30 हजार रुपये कर दी गई। जमानत के लिए अदालत में एक बाइक के दस्तावेज जमा कराए गए। बृहस्पतिवार शाम को सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद किशोर को बाल सुधार गृह से रिहा कर दिया गया। उधर, पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के समय किशोर ने स्वयं को बालिग बताया था, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की गई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी