पहुंज नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए एनजीटी की शरण, सरकारी विभागों को नोटिस

 


14 कॉलोनी,कई शो रूम व स्कूलों ने किया पहुंज को प्रभावित

झांसी, 25 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी में पहुंज नदी के अस्तित्व और जलधारा को बचाने के लिए एनजीटी में याचिका दायर करने वाले नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव और डेनियल साइमन ने कहा कि नदी के संरक्षण के लिए वे हर स्तर पर प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दायर याचिका पर जिला प्रशासन समेत संबंधित सरकारी विभागों को नोटिस जारी किए गए हैं और उनके जवाब का इंतजार है।

मीडिया से बातचीत में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि लगातार अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों के कारण पहुंज नदी के अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने निर्माणाधीन संफ्रान सरोवर हाइट्स प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि एनजीटी के मानकों के विपरीत निर्माण कराया जा रहा है। आरोप है कि नदी की जलधारा को भी मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं के मुताबिक जियो टैग मैप के अध्ययन में नदी के स्वरूप से छेड़छाड़ सामने आई है। उन्होंने कहा कि झांसी की पेयजल व्यवस्था में पहुंज नदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसलिए नदी के उद्गम स्थल से लेकर अंतिम छोर तक उसके प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखना जरूरी है।

नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव और डेनियल साइमन ने कहा कि नंदनपुरा क्षेत्र में नदी को सबसे अधिक क्षति पहुंची है। उनके अनुसार नदी और आसपास के क्षेत्रों में करीब 14 कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। इसके अलावा शोरूम, स्कूल और अन्य निर्माणों से भी नदी के क्षेत्र पर असर पड़ा है।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि एनजीटी ने उन सरकारी विभागों को भी नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने संबंधित क्षेत्रों में अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि विभागों के जवाब मिलने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहे तो मौके के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी में दाखिल की जाएगी, ताकि नदी की वास्तविक स्थिति ट्रिब्यूनल के समक्ष रखी जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया