कैमाशन पहाड़ी पर कब्जों के आरोप, एनजीटी में सुनवाई टलने से आंदोलनकारियों में आक्रोश

 


झांसी, 26 अक्टूबर (हि.स.)। मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित करीब 500 फीट ऊंची प्राकृतिक एवं ऐतिहासिक कैमाशन पहाड़ी पर कथित अवैध कब्जों और निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पहाड़ी को काटकर निर्माण किए जाने के आरोपों के बीच मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में विचाराधीन है। सुनवाई लगातार टलने से आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ रही है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों के संरक्षण में पहाड़ी की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता भानु सहाय ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से प्राचीन पहाड़ी को काटकर नर्सिंग होम और बहुमंजिला इमारतों का निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि राजनीतिक संरक्षण के बिना इस तरह का अवैध निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने सरकार के सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने के दावों पर भी सवाल उठाए।

एनजीटी में सुनवाई टलने से बढ़ा आक्रोश

याचिकाकर्ता के अनुसार, मामले में अधिकारियों की कथित भूमिका से जुड़े साक्ष्य एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उनका दावा है कि 21 जनवरी 2026 को एनजीटी ने संबंधित अधिकारियों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि इसके बाद भी सुनवाई लगातार टलती रही।

मोर्चा का कहना है कि 16 अक्टूबर 2026 को निर्धारित सुनवाई में भी चिकित्सा और व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर स्थगन लिया गया, जिससे मामले की सुनवाई आगे बढ़ गई। इससे पहाड़ी संरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे लोगों में असंतोष है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

भानु सहाय ने कहा कि प्राकृतिक संपदा और ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहाड़ी बचाने की मांग को लेकर आंदोलन करने वालों पर मुकदमे दर्ज कर उन्हें दबाने का प्रयास किया जा रहा है। मोर्चा ने चेतावनी दी कि अवैध कब्जों के खिलाफ कानूनी लड़ाई के साथ जनआंदोलन भी तेज किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया