शरीर पर जवारे बोकर शिवा वर्मा कर रहे कठोर साधना

 


झांसी, 18 अक्टूबर (हि.स.)। श्री सिद्धेश्वर सिद्ध पीठ में मां गायत्री की आराधना के बीच गुरुकुल के साधक और बचपन से मंदिर सेवा में जुटे भक्त शिवा वर्मा इन दिनों कठिन साधना में लीन हैं। उन्होंने अपने शरीर पर जवारे बोए हैं और चारों ओर खप्परों में जवारे रखकर मां भगवती की आराधना कर रहे हैं। भक्तों के बुंदेली भजनों के बीच चल रही इस साधना को देखने के लिए श्रद्धालु भी पहुंच रहे हैं।

आचार्य हरिओम पाठक द्वारा बताया गया कि नवरात्रि से करीब चार दिन पहले शिवा वर्मा के मन में शरीर पर जवारे बोकर कठोर साधना करने का भाव आया। उन्होंने गुरुजी के समक्ष अपनी इच्छा रखी। गुरुजी से साधना की विधि, नियम, व्यवस्था और मंत्र जाप की जानकारी लेने के बाद उन्होंने यह कठिन साधना करने का संकल्प लिया। नवरात्रि से तीन दिन पहले ही उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर दिया और लगातार सीधे लेटने का अभ्यास शुरू किया।

11 अक्टूबर से उन्होंने अपने शरीर पर जवारे बोकर मां के समक्ष साधना शुरू की। मंदिर में चतुर्मुखी मां विराजमान हैं, जबकि समीप ही सिद्धों के सिद्ध गुरु गोरखनाथ को आसन दिया गया है। यहां अखंड ज्योति के समक्ष शिवा साधना में लीन हैं। श्रद्धालु बुंदेली गीत और भजनों के माध्यम से उनकी साधना में सहभागी बन रहे हैं।

गुरुजी के अनुसार यह भगवती जगदंबा की कृपा प्राप्त करने के लिए की जाने वाली कठिन हठयोग साधना है। मान्यता है कि बुंदेलखंड में पूर्व में भी भक्तों ने इस प्रकार की साधना की है। श्रद्धालुओं के अनुसार ऐसी साधना में मां की कृपा प्राप्त होने और भक्त की वाणी सिद्ध होने की आस्था जुड़ी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया