नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा की ‘बगावत’ भारी, रितिका हारी

 


बागी प्रत्याशी नीता विकास यादव ने 10 वोट लेकर दर्ज की जीत

महेश गौतम को सर्वाधिक 11 वोट, नौवीं बार कार्यकारिणी में पहुंचे

क्रॉस वोटिंग ने खोली पार्टी के अंदरूनी खींचतान की पोल

झांसी, 10 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी महानगर में नगर निगम कार्यकारिणी के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अंदर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई। पार्टी के अधिकृत पैनल से अलग होकर मैदान में उतरीं भाजपा पार्षद नीता विकास यादव ने न केवल चुनाव को निर्विरोध होने से रोक दिया, बल्कि 10 वोट हासिल कर जीत भी दर्ज कर ली। उनके मैदान में उतरने से भाजपा के समीकरण ऐसे बिगड़े कि पार्टी के अधिकृत पैनल की प्रत्याशी रितिका गौरव तिवारी को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया कि भाजपा के भीतर हुई क्रॉस वोटिंग ने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को बड़ा झटका दिया।

विपक्षी खेमे के प्रत्याशी महेश गौतम ने 11 वोट हासिल कर सर्वाधिक मत प्राप्त किए। इसके साथ ही वह लगातार नौवीं बार नगर निगम कार्यकारिणी के सदस्य बनने में सफल रहे। भाजपा के अधिकृत पैनल में शामिल सुनील नैनवानी, राजकुमारी अनिल पचू, रामजी यादव और राखी नितेन्द्र परिहार ने भी नौ-नौ वोट लेकर जीत दर्ज की। इस तरह छह सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा के पांच अधिकृत प्रत्याशियों में से चार जीत गए, जबकि बागी प्रत्याशी ने एक सीट अपने नाम कर ली।

नामांकन से ही शुरू हो गई थी बगावत

कार्यकारिणी की छह सीटों के लिए भाजपा ने सुनील नैनवानी, राजकुमारी अनिल पचू, रितिका गौरव तिवारी, रामजी यादव और राखी नितेन्द्र परिहार को अधिकृत प्रत्याशी बनाया था। माना जा रहा था कि पांच भाजपा प्रत्याशियों और विपक्ष के बीच सहमति से चुनाव निर्विरोध हो जाएगा। लेकिन नामांकन के दौरान ही पूरा समीकरण बदल गया।

भाजपा पार्षद नीता विकास यादव ने पार्टी के अधिकृत पैनल से अलग जाकर नामांकन दाखिल कर दिया। इससे छह सीटों के लिए प्रत्याशियों की संख्या सात हो गई और मतदान तय हो गया। पिछले करीब साढ़े तीन साल में पहली बार कार्यकारिणी सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान की नौबत आई।

सबसे ज्यादा चर्चा

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि नीता विकास यादव के नामांकन में भाजपा की ही पार्षद ममता सुगरपाल प्रस्तावक बनीं। इससे पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी और गुटबाजी को लेकर चर्चाओं का बाजार और गर्म हो गया।

भाजपा के अंदर ही क्रॉस वोटिंग का खेल

चुनाव से पहले तक निर्विरोध जीत की उम्मीद लगाए बैठे भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों को मतदान के ऐन पहले समर्थन जुटाने के लिए सक्रिय होना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक भाजपा के कुछ पार्षदों ने बागी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। माना जा रहा है कि करीब चार से छह पार्षदों की क्रॉस वोटिंग ने अधिकृत पैनल के समीकरण को प्रभावित किया।

वहीं विपक्षी खेमे ने महेश गौतम को अपना सर्वसम्मत प्रत्याशी बनाया। संजीव गुप्ता ने भी शुरुआत में नामांकन दाखिल किया था, लेकिन बाद में नाम वापस ले लिया। इससे विपक्ष का पूरा समर्थन महेश गौतम के पक्ष में चला गया।

तीन जनप्रतिनिधि मतदान से रहे दूर

मतदान के दौरान तीन पार्षद/जनप्रतिनिधि वोट डालने नहीं पहुंचे। पार्षद कन्हैया कपूर अनुपस्थित रहे। वहीं विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह और रामतीर्थ सिंघल ने भी मतदान में हिस्सा नहीं लिया। दूसरी ओर सांसद अनुराग शर्मा,महापौर बिहारी लाल आर्य, विधान परिषद सदस्य रमा निरंजन, डॉ. बाबूलाल तिवारी और सदर विधायक रवि शर्मा ने मतदान किया।

वरीयता के आधार पर हुई वोटिंग के बाद मतगणना में महेश गौतम को सर्वाधिक 11 मत मिले। बागी प्रत्याशी नीता विकास यादव को 10 वोट मिले। भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों में रितिका गौरव तिवारी को छोडक़र सभी ने नौ-नौ मत हासिल किए और विजयी घोषित हुए।

अंतिम कार्यकारिणी चुनाव ने छोड़ दिया सवाल

नगर निगम के मौजूदा बोर्ड का यह कार्यकारिणी चुनाव अंतिम चुनावों में से एक माना जा रहा है। इसके बाद विधानसभा चुनाव और फिर नगर निगम चुनाव होने हैं। ऐसे में कार्यकारिणी में जगह बनाने को लेकर पार्षदों के बीच राजनीतिक सक्रियता स्वाभाविक रूप से बढ़ी हुई थी।

नीता विकास यादव का अधिकृत सूची से अलग जाकर नामांकन दाखिल करना और उनके नामांकन में भाजपा की ही पार्षद का प्रस्तावक बनना पार्टी के अंदर की नाराजगी को सतह पर ले आया। परिणामों में रितिका गौरव तिवारी की हार और नीता यादव की जीत ने इस खींचतान को और स्पष्ट कर दिया है।

चुनाव तो खत्म हो गया, लेकिन परिणाम भाजपा के लिए कई सवाल छोड़ गया है। पार्टी के अधिकृत पैनल के खिलाफ वोट आखिर कहां से आए और बागी प्रत्याशी के पक्ष में किस स्तर पर लामबंदी हुई,अब यही सवाल भाजपा के अंदर मंथन का विषय बन गया है।

अव्यवस्थाएं रही हावी

मतदान के दौरान अव्यवस्थाएं पूरी तरह से हावी रही। निर्वाचन अधिकारी के कहने के बावजूद भी लोगेां का जमावड़ा लगा रहा। हालांकि निर्वाचन अधिकारी शुरू में ही पुलिस का डर दिखाते नजर आये थे। कई बार सदर में लगा अंदर की ओर वाला गुप्त दरवाजा खुलता और बंद होता रहा है लोग आते-जाते रहे तो कभी जन प्रतिनिधियों को देखकर चुनाव कराने वाले कर्मचारी नियमों को तक भूल बैठे। चुनाव अधिकारियों को कोई चाय-पानी तक पूछने वाला दिखाई नहीं दिया। उन्हें उठकर बीच चुनाव में भोजन करने जाना पड़ा।

पैन का पेन

निर्वाचन के दौरान मतदान करने वालों के लिए उम्मीदवार पार्षदों के नाम के आगे निशान लगाने के लिए पैन की व्यवस्था करीब आधा घण्टे तक नहीं हो सके जिसके चलते मतदान रुका रहा और लोगों ने इस पर सवाल भी उठाए।

हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया