अधिकारियों की मिलीभगत व व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने वालों की कराएंगे जांच : विधायक

 


डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की सड़क चौड़ीकरण को 30 करोड़ के ठेके का मामला

ठेकेदार ने फर्म ‘नॉन-रिस्पॉन्सिव’ घोषित करने पर उठाए थे गंभीर सवाल

झांसी, 10 अप्रैल (हि.स.)। उप्र के झांसी में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की निविदा प्रक्रिया में त्रुटि के चलते गलत तरीके से फर्म को ‘नॉन-रिस्पॉन्सिव’ घोषित करने व अधिकारियों की मिलीभगत के चलते व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने वालों के खिलाफ शुक्रवार को विधायक गरौठा जवाहरलाल राजपूत सख्त नजर आए।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना डिफेंस कॉरिडोर की सड़क चौड़ीकरण के लिए निविदा प्रक्रिया में धांधली के आरोपों पर स्पष्ट किया कि यदि अधिकारियों ने व्यक्तिगत लाभ के लिए नियमों को ताक पर रखकर कोई काम किया है तो उसकी जांच कराई जाएगी। साथ ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

दरअसल एम/एस बद्री प्रसाद मुद्गिल फर्म ने विधायक को प्रेषित पत्र में कहा है कि संबंधित कार्य डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत सडक़ चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण से जुड़ा है। प्रारंभ में इस कार्य की अनुमानित लागत 28.50 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में करेक्शन जारी कर 30 करोड़ रुपये कर दिया गया। फर्म का आरोप है कि 30 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली निविदाओं में बैच मिक्स प्लांट अनिवार्य होता है, लेकिन विभाग द्वारा जारी शर्तों में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।

फर्म ने यह भी कहा कि प्रहरी पोर्टल पर बैच मिक्स प्लांट अपलोड करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे निविदा प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति बनी रही। इसके बावजूद विभाग ने अन्य ठेकेदार की शिकायत के आधार पर फर्म को नॉन-रिस्पॉन्सिव घोषित कर दिया, जो संदेहास्पद प्रतीत होता है।

पत्र में आरोप लगाया गया कि विभाग ने कुछ ठेकेदारों के साथ मिलकर पूर्व नियोजित तरीके से कार्रवाई की है। फर्म ने मांग की है कि जिन ठेकेदारों ने बैच मिक्स प्लांट अपलोड किया है, उनकी श्रेणी (मशीनरी प्रमुख) की जानकारी सार्वजनिक की जाए।

फर्म ने विभाग से नॉन-रिस्पॉन्सिव घोषित करने के आदेश को तत्काल निरस्त करने, निविदा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और न्याय प्रदान करने की मांग की है। इस मामले में संदेह होने पर ठेकेदार द्वारा 6 अप्रैल 2026 को ही जिलाधिकारी को व आईजीआरएस पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी।

यही नहीं उच्च न्यायालय में भी इस मामले को सुना जा रहा है। उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि मामले में सुनवाई 13 अप्रैल को होनी है। तब तक मामले को यथास्थिति में रखा जाए। आरोप है कि बाबजूद इसके झांसी के सीमावर्ती मप्र के जिले में जाकर अधिकारियों ने एक दिन के अंदर ही निविदा प्रक्रिया से संबंधित कार्य पूर्ण कर लिया।

इस संबंध में कई बार अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी को फोन करने के बाबजूद फोन नहीं उठाया गया और न ही कोई जानकारी दी गई।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया