दुष्यंत की रचनाओं के समकक्ष हैं संतोष सिंह अकेला की ग़ज़लें : प्रो. अनंत मिश्रा
कवियों ने ही राम, कृष्ण और बुद्ध के व्यक्तित्व को जन-जन तक पहुंचाया'
गोरखपुर, 21 जून (हि.स.)। साहित्य समाज का दर्पण होता है और सच्चा कवि अपने समय की पीड़ा, संघर्ष, संवेदना और यथार्थ को शब्दों के माध्यम से अमर कर देता है। यही कारण है कि कवियों ने अपने साहित्य के माध्यम से राम, कृष्ण, बुद्ध और अन्य महापुरुषों के व्यक्तित्व को जनमानस में स्थापित कर उन्हें अमर बना दिया। संतोष सिंह अकेला की रचनाओं में भी वही सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और यथार्थ का सशक्त स्वर दिखाई देता है, जो महान कवि दुष्यंत कुमार की रचनाओं में मिलता है।
यह विचार पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात साहित्यकार प्रो. अनंत मिश्रा ने रविवार को बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट सभागार में अधिवक्ता एवं साहित्यकार संतोष सिंह अकेला के छठे ग़ज़ल संग्रह कुछ तुम्हारी, कुछ हमारी के भव्य विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि ईश्वर ने इस संसार में किसी भी मनुष्य को छोटा या बड़ा नहीं बनाया है। प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर विशिष्टता लेकर जन्म लेता है। सच्चा कवि वही होता है जो समाज की पीड़ा, प्रेम, विरह, संघर्ष और मानवीय मूल्यों को शब्दों में ढालकर उसे जन-जन तक पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि अकेला होना आसान नहीं है। नेता, अभिनेता या अनुयायी बनना आसान हो सकता है, लेकिन सृजनशील कवि बनने के लिए गहन तपस्या करनी पड़ती है। कविता का जन्म व्यक्ति के एकांत, आत्ममंथन और संवेदनशील मन से होता है। सत्य यही है कि प्रत्येक मनुष्य अंततः अकेला और अकिंचन है।
साहित्य में सामाजिक यथार्थ का सशक्त चित्रण
समारोह के मुख्य वक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक नारायण धर दुबे ने कहा कि किसी भी रचनाकार की अभिव्यक्ति उसके परिवेश और सामाजिक परिस्थितियों से प्रभावित होती है। संतोष सिंह अकेला की ग़ज़लों में पारिवारिक, सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक विसंगतियों का अत्यंत प्रभावी एवं यथार्थ चित्रण देखने को मिलता है। उनकी रचनाएं केवल भावनाओं का प्रकटीकरण नहीं बल्कि समाज को दिशा देने का प्रयास भी हैं।
उत्कृष्ट साहित्यिक कृति बताया ग़ज़ल संग्रह
पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी एवं पत्रकारिता विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रामदरश राय ने अपने संबोधन में ग़ज़ल संग्रह कुछ तुम्हारी, कुछ हमारी को साहित्य की दृष्टि से अत्यंत स्तरीय एवं उत्कृष्ट कृति बताते हुए कहा कि यह संग्रह समकालीन समाज की वास्तविकताओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।
विशिष्ट अतिथियों ने दी शुभकामनाएं
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में अपर आयुक्त (न्यायिक) राजेश श्रीवास्तव, बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट के अध्यक्ष उमापति उपाध्याय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव, पूर्व अध्यक्ष बलवंत शाही तथा भानु प्रताप पांडे ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए संतोष सिंह अकेला को उनकी साहित्यिक उपलब्धि पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम मिलन, पूर्व मंत्री रवि प्रकाश शुक्ला, आयोजक शिवप्रसाद निषाद, पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष रत्नाकर सिंह, मोहम्मद इमरान, प्रमोद धर दुबे, कमल श्रीवास्तव, जितेंद्र कुमार भारती सहित अनेक अधिवक्ताओं एवं गणमान्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
समारोह का सफल संचालन अनूप पांडे एवं कमलेश सिंह ने संयुक्त रूप से किया, जबकि आयोजक शिवकुमार निषाद, एडवोकेट ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभव श्रीवास्तव, उर्मिला सिंह, शिवानंद, सुनील कुमार, अरविंद यादव, प्रवीण शुक्ला, मसूदउल हसन, राजकुमार श्रीवास्तव, अभय गुप्ता, विशाल सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता, समाजसेवी, साहित्यकार, नाटककर्मी एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम साहित्यिक गरिमा, गंभीर विमर्श और ग़ज़लों की सराहना के बीच संपन्न हुआ।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय