बौद्धिक संपदा अधिकार से मजबूत होती है ब्रांड पहचान : नवदीप श्रीधर

 


कानपुर, 24 अक्तूबर (हि.स.)। किसी कंपनी की ब्रांड पहचान, उत्पादों का डिजाइन, मौलिक रचनाएं और तकनीकी आविष्कार उसकी महत्वपूर्ण व्यावसायिक संपत्तियां हैं। इनका कानूनी संरक्षण प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिलाने के साथ उपभोक्ताओं का विश्वास बनाए रखने और नवाचार को बढ़ावा देने में मदद करता है। यह बातें शनिवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पूर्व छात्र नवदीप श्रीधर ने स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट में आयोजित विशेष व्याख्यान में विद्यार्थियों से कहीं।

बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर आयोजित इस व्याख्यान में नवदीप श्रीधर ने बताया कि किसी उत्पाद की सफलता उसकी गुणवत्ता के साथ ब्रांड की विशिष्ट पहचान, विश्वसनीयता और कानूनी संरक्षण पर भी निर्भर करती है। उन्होंने ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, पेटेंट, औद्योगिक डिजाइन, भौगोलिक संकेतक (जीआई), सेमीकंडक्टर एकीकृत परिपथों के लेआउट-डिजाइन और पौधों की किस्मों के संरक्षण की जानकारी दी।

उन्होंने समझाया कि प्रत्येक बौद्धिक संपदा अधिकार का उद्देश्य और संरक्षण का तरीका अलग होता है। किसी उत्पाद या रचना के लिए उपयुक्त अधिकार का चयन उसकी विशेषताओं और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।

व्याख्यान में न्यूटेला, ओडोनिल और गोदरेज जैसे ब्रांडों की केस स्टडी के माध्यम से ब्रांड पहचान, पैकेजिंग, उत्पाद डिजाइन और बाजार में अलग स्थान बनाने की रणनीतियों को समझाया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि उत्पाद का नाम, लोगो और विशिष्ट डिजाइन किस तरह उसकी व्यावसायिक पहचान और मूल्य बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं।

सत्र में बनारसी उत्पादों सहित उत्तर प्रदेश के जीआई उत्पादों और उनके पंजीकरण की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। इसके साथ कॉपीराइट के व्यावसायिक एवं गैर-व्यावसायिक उपयोग, सॉफ्टवेयर संरक्षण तथा भारत और अमेरिका में इससे जुड़े कानूनी दृष्टिकोणों की जानकारी दी गई।

पेटेंट के संदर्भ में नवीनता, आविष्कारशील कदम और औद्योगिक उपयोगिता के महत्व को भी स्पष्ट किया गया। व्याख्यान का उद्देश्य विद्यार्थियों को व्यावसायिक उदाहरणों के माध्यम से बौद्धिक संपदा अधिकारों की उपयोगिता समझाना और भविष्य में नवाचार तथा व्यवसाय प्रबंधन के क्षेत्र में उनके व्यावहारिक ज्ञान को मजबूत करना रहा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप