लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक-2026 में गूंजेगा गोरखपुर का मॉडल, मानव सेवा संस्थान (SEVA) करेगा आधिकारिक प्रस्तुति
गोरखपुर, 17 जून (हि.स.)। पूर्वांचल के लिए गर्व और सम्मान का विषय है कि गोरखपुर स्थित मानव सेवा संस्थान (SEVA) को विश्व के प्रतिष्ठित जलवायु मंच लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक-2026 में अपनी अभिनव पर्यावरणीय पहल प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हुआ है। संस्थान का चयन इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के आधिकारिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए किया गया है, जहां दुनिया भर के नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, पर्यावरण विशेषज्ञ, शोधकर्ता, सामाजिक संगठन और जलवायु क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे।
यह कार्यक्रम 26 जून 2026 को लंदन (यूनाइटेड किंगडम) में आयोजित होगा। इस अवसर पर मानव सेवा संस्थान (SEVA) द्वारा “Birth-Linked Geo-Verified Carbon Sinks: A Digital MRV Framework for Scalable Negative Emissions with Community Stewardship in South Asia” विषय पर प्रस्तुति दी जाएगी। यह मॉडल दक्षिण एशिया में विकसित एक अभिनव और समुदाय आधारित जलवायु समाधान है, जो जन्म को वृक्ष संरक्षण और कार्बन अवशोषण से जोड़ने की परिकल्पना पर आधारित है।
संस्थान के कार्यकारी निदेशक पुरु मयंक त्रिपाठी ने इस उपलब्धि को संस्था, गोरखपुर और पूरे देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि किसी वैश्विक जलवायु मंच पर आधिकारिक प्रस्तुति के लिए चयनित होना वर्षों से किए जा रहे सामाजिक, पर्यावरणीय और सामुदायिक प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान है। उन्होंने कहा कि यह अवसर भारत और दक्षिण एशिया के समुदाय आधारित जलवायु नवाचारों को विश्व के सामने रखने का सशक्त माध्यम बनेगा।
जन्म से जुड़ेगा वृक्ष, तकनीक करेगी निगरानी
प्रस्तावित मॉडल के अंतर्गत प्रत्येक नवजात शिशु को एक भू-सत्यापित (Geo-Verified) वृक्ष से जोड़ा जाएगा। पाैधरोपण के बाद उसकी निरंतर निगरानी, संरक्षण और विकास का रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से रखा जाएगा। यह व्यवस्था केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह सुनिश्चित करेगी कि वृक्ष दीर्घकाल तक जीवित रहें और पर्यावरण संरक्षण में वास्तविक योगदान दें।
श्री त्रिपाठी ने बताया कि यह मॉडल आधुनिक Monitoring, Reporting and Verification (MRV) प्रणाली पर आधारित है। इसके माध्यम से वृक्षों की वास्तविक स्थिति, विकास दर, जीवित रहने की संभावना तथा उनके द्वारा किए जा रहे कार्बन अवशोषण का वैज्ञानिक और पारदर्शी आकलन संभव होगा। इससे जलवायु कार्रवाई को अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने का सामुदायिक समाधान
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन मानव सभ्यता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। ऐसे में केवल वृक्षारोपण अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि वृक्षों के दीर्घकालिक संरक्षण और सामुदायिक स्वामित्व को सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। जन्म को वृक्ष संरक्षण से जोड़ने की यह अवधारणा समाज में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करेगी और नई पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण से भावनात्मक रूप से जोड़ेगी।
यह पहल मापनीय कार्बन अवशोषण, जैव विविधता संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी, जलवायु सहनशीलता तथा सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास करती है। साथ ही यह मॉडल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और प्रकृति आधारित जलवायु समाधानों की वैश्विक अवधारणा के अनुरूप भी है।
अंतरराष्ट्रीय विमर्श में देगा नई दिशा
मानव सेवा संस्थान की टीम का मानना है कि यह प्रस्तुति जलवायु न्याय, कार्बन शासन, सामुदायिक सहभागिता और सतत विकास से जुड़े वैश्विक विमर्श में दक्षिण एशिया की भूमिका को मजबूत करेगी। साथ ही यह भारत में विकसित स्थानीय और समुदाय आधारित पर्यावरणीय मॉडलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।
कार्यकारी निदेशक पुरु मयंक त्रिपाठी ने संस्थान से जुड़े शोधकर्ताओं, स्वयंसेवकों, सामुदायिक नेताओं, सहयोगी संगठनों और समर्थकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग, विश्वास और समर्पण के कारण ही यह महत्वपूर्ण उपलब्धि संभव हो सकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि लंदन में होने वाली यह प्रस्तुति भविष्य में भारत और दक्षिण एशिया की जलवायु पहलों के लिए नए अवसरों और वैश्विक साझेदारियों के द्वार खोलेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय