प्रयोगशाला के अनुसंधान को बाजार तक पहुंचाने में मदद करेगा नवाचार केंद्र : मणीन्द्र अग्रवाल

 


कानपुर, 17 सितंबर (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर में स्थापित वाधवानी नवाचार केंद्र स्वास्थ्य क्षेत्र के अनुसंधान को उपयोगी उत्पादों और सेवाओं में बदलने में मदद करेगा। शोधकर्ताओं को तकनीक के विकास, परीक्षण और बाजार तक पहुंचाने में सहयोग दिया जाएगा। यह बातें गुरुवार को आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने केंद्र के शुभारंभ के दौरान कही।

वाधवानी चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से स्थापित इस उत्कृष्टता केंद्र को पांच वर्षों में 50 लाख अमेरिकी डॉलर की वित्तीय सहायता मिलेगी। इससे जीवन विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, चिकित्सा प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। केंद्र का शुभारंभ रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के महानिदेशक डॉ. उपेंद्र कुमार सिंह की उपस्थिति में हुआ।

केंद्र में उपचार संबंधी तकनीक, पुनर्योजी चिकित्सा, दवा पहुंच प्रणाली, टीका, चिकित्सा उपकरण और रोग पहचान के साथ तंत्रिका क्षय संबंधी बीमारियों, मानसिक स्वास्थ्य और रोगाणुरोधी प्रतिरोध जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को सहयोग मिलेगा। शोधकर्ताओं को तकनीक के प्रमाणीकरण, बौद्धिक संपदा और नियामकीय प्रक्रियाओं में सहायता देने के साथ उद्योग जगत से जोड़ा जाएगा।

वाधवानी नवाचार नेटवर्क के प्रबंध निदेशक डॉ. शिरशेंदु मुखर्जी ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान की कमी नहीं है, लेकिन प्रयोगशाला के अनुसंधान को बाजार तक पहुंचाने के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है। नेटवर्क शोधकर्ताओं को विशेषज्ञता, उद्योग साझेदारी, पूंजी और व्यावसायीकरण संबंधी सहायता उपलब्ध करा रहा है।

आईआईटी कानपुर के प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि केंद्र वैज्ञानिक खोजों को प्रयोगशाला से आगे ले जाकर जरूरतों और व्यावहारिक उपयोग से जोड़ेगा। प्रो. संतोष मिश्रा ने कहा कि चिकित्सकीय जरूरतों, अभियांत्रिकी विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों को जोड़कर चिकित्सा उत्पाद और समाधान विकसित किए जा सकेंगे।

शुभारंभ के बाद अनुसंधान को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने और नियामकीय प्रक्रियाओं पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई। इसमें नियामक एजेंसियों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य क्षेत्र, उद्योग और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में प्रयोगशाला में विकसित नवाचारों को चिकित्सकीय परीक्षण, नियामकीय मंजूरी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने के विभिन्न चरणों पर चर्चा हुई।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप