कानपुर आईआईटी के शोध को आम लोगों तक पहुंचाने में उद्योग की साझेदारी अहम : मणींद्र अग्रवाल

 


कानपुर, 16 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के अनुसंधान को ऐसे समाधानों में बदलना जरूरी है, जो लोगों के जीवन को बेहतर बना सकें। इसके लिए शिक्षा, उद्योग और उद्यमिता के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ शोध को प्रयोगशालाओं से निकालकर जरूरतमंद समुदायों तक पहुंचाना होगा, यह बातें शुक्रवार को आईआईटी कानपुर के निदेशक मणींद्र अग्रवाल ने समन्वय 2026 के समापन पर कही।

आईआईटी कानपुर की ओर से नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित उद्योग-अकादमिक एवं नवाचार सम्मेलन समन्वय 2026 का तीसरा संस्करण संपन्न हुआ। सम्मेलन में उद्योग, सरकार और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने अनुसंधान आधारित नवाचार को बढ़ावा देने और आपसी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इस दौरान आईआईटी कानपुर और गेट्स फाउंडेशन ने स्थानीय स्तर पर विकसित किफायती नैदानिक समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए साझेदारी की घोषणा की। कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि समन्वय अकादमिक जगत, अनुसंधान और उद्योग को एक मंच पर लाने की अच्छी पहल है। जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकें अगली औद्योगिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। भारत को शोध को प्रयोगशालाओं से निकालकर वास्तविक उत्पादों में बदलने के लिए दीर्घकालिक साझेदारियों की जरूरत है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में ऐसे मंच अहम भूमिका निभाएंगे।

गेट्स फाउंडेशन की इंडिया कंट्री डायरेक्टर अर्चना व्यास ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा, इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमता किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य तकनीकों की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकती है। आईआईटी कानपुर के साथ साझेदारी के जरिए इंजीनियरिंग, जैव प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को जोड़कर सुविधाओं से वंचित समुदायों के लिए सुलभ नैदानिक समाधान विकसित करने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।

सम्मेलन में मिरिक गोगरी ने मुख्य वक्तव्य दिया। इसके बाद भारत के नवाचार भविष्य को आकार देने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों पर परिचर्चा हुई। स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और बेहतर समाज के लिए तकनीक एवं अनुसंधान के इस्तेमाल जैसे विषयों पर भी विचार रखे गए । आईआईटी कानपुर के तीन विशेषज्ञों ने भी व्याख्यान दिए। प्रो. तरुण गुप्ता ने भारत के विकास के निर्णायक दशक में नवाचार, प्रो. अनिल के. ललवानी ने समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य और प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी ने अनुसंधान को वास्तविक जीवन में प्रभावी बनाने के लिए सहयोग की भूमिका पर बात की।

प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी में 21 प्रदर्शकों ने हिस्सा लिया। यहां एयरोस्पेस, उन्नत सामग्री, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, सतत ऊर्जा, चिकित्सा प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स और सटीक कृषि से जुड़े नवाचार प्रस्तुत किए गए। इसमें आईआईटी कानपुर के विभिन्न केंद्रों और स्कूलों के साथ कई संस्थानों एवं कंपनियों ने भाग लिया।

आईआईटी कानपुर ने 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में ‘ग्रेटर दैन अस’ अभियान भी शुरू किया था। इसके तहत मार्च 2029 तक एक अरब अमेरिकी डॉलर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस राशि से संस्थान की बुनियादी क्षमताओं को मजबूत करने, प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और अत्याधुनिक अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप