भारत केवल विकसित नहीं, बल्कि आदर्श राष्ट्र बनेगा : स्वांत रंजन

 


कानपुर, 11 मई (हि.स.)। जब समाज समरस होगा, परिवार संस्कारित होगा, प्रकृति सुरक्षित होगी, स्वदेशी सशक्त होगा और नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होंगे तब भारत केवल विकसित राष्ट्र नहीं, बल्कि विश्व के लिए आदर्श राष्ट्र बनेगा। यह बातें सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख स्वांत रंजन ने कहीं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कानपुर प्रांत द्वारा छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के सेनानायक तात्या टोपे सीनेट हॉल में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की।

प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारत विश्व के सबसे युवा देशों में शामिल है और देश की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा ऊर्जा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र के विचार, चरित्र और नेतृत्व निर्माण का मंच होता है। पंच परिवर्तन की अवधारणा में युवाओं और छात्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

स्वांत रंजन ने कहा कि वर्तमान समय केवल आर्थिक विकास का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पुनर्जागरण का कालखंड है। भारत की आत्मा को समझे बिना उसके भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन व्यक्ति से राष्ट्र तक परिवर्तन का व्यापक सांस्कृतिक आंदोलन है, जिसके माध्यम से समरस, आत्मनिर्भर और संस्कारित भारत का निर्माण संभव है।

उन्होंने सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य को पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख विषय बताते हुए कहा कि समाज में भेदभाव के स्थान पर बंधुत्व की भावना विकसित करनी होगी। परिवार को संस्कार का पहला केंद्र बनाना होगा तथा प्रकृति के साथ सहअस्तित्व और स्वदेशी को आत्मनिर्भर भारत का आधार बनाना होगा।

कार्यक्रम में कानपुर प्रांत संघचालक भवानी भीख तिवारी, प्रांत प्रचारक श्रीराम, भाग संघचालक डॉ. वीरेंद्र सिंह चंदेल, ज्ञानेंद्र सिंह, घनश्याम अग्निहोत्री, विभाग प्रचारक बैरिस्टर, भाग प्रचारक शिवम सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और प्रबुद्धजन मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दुर्गेश ने किया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप