डिजिटल की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका : मंडलायुक्त
--बारह सौ से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियां ऑनलाइन उपलब्ध
--विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस पर राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी में डिजिटल रिपॉजिटरी व कियोस्क का शुभारम्भ
प्रयागराज, 23 अप्रैल (हि.स)। ज्ञान-सम्पदा के संरक्षण और उसे जनसामान्य तक सुलभ बनाने की दिशा में, विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस के अवसर पर गुरुवार काे राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी, प्रयागराज में स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत विकसित डिजिटल रिपॉजिटरी एवं कियोस्क का शुभारम्भ मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने सेंट्रल हॉल में स्थापित कियोस्क का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर मंडलायुक्त ने कहा कि राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी ज्ञान का अमूल्य भंडार है और इसका डिजिटलीकरण समय की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिकाधिक दुर्लभ पांडुलिपियों को डिजिटल माध्यम से संरक्षित कर पुस्तकालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि देश-विदेश के शोधार्थी भी इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल माध्यम न केवल ज्ञान तक पहुंच को सरल बनाता है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के संरक्षण प्रमुख प्रोफेसर अचल पांडे ने पांडुलिपियों एवं पुस्तकों की वैज्ञानिक कैटलॉगिंग तथा उपयुक्त मेटाडाटा तैयार करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सुव्यवस्थित डिजिटल अभिलेखन से शोध कार्यों की गुणवत्ता में वृद्धि होगी और सामग्री का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
पुस्तकालय के लाइब्रेरियन गोपाल शुक्ला ने बताया कि इस डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी देश की अग्रणी पुस्तकालयों में शामिल हो गई है। जहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुर्लभ ज्ञान-संसाधनों को संरक्षित और उपलब्ध कराया जा रहा है। इस अवसर पर डिजिटलीकरण के माध्यम से विकसित दुर्लभ पांडुलिपियों की कुछ कलाकृतियों का अवलोकन भी किया गया, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं। कार्यक्रम में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर राशिद सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
जिला सूचना कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार डिजिटल रिपॉजिटरी के प्रथम चरण में 100 वर्ष से अधिक पुरानी 1200 से अधिक दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया गया है। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को अब शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें अध्ययन और शोध में सुविधा मिलेगी। सेंट्रल हॉल में स्थापित कियोस्क के माध्यम से उपयोगकर्ता इन पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त कर उन्हें डिजिटल रूप में देख सकेंगे।
स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत पुस्तकालय के समग्र विकास के लिए तीन प्रमुख कार्यों का वित्तपोषण किया गया है। प्रथम चरण में भवन का जीर्णोद्धार एवं संरक्षण कार्य पूरा किया गया। द्वितीय चरण में पांडुलिपियों, दस्तावेजों, समाचारपत्रों और पत्रिकाओं का डिजिटल संग्रह विकसित किया जा रहा है। तृतीय चरण में कियोस्क की स्थापना के साथ-साथ सुरक्षा हेतु सीसीटीवी कैमरे, सर्वर एवं वेबसाइट का विकास, लगभग एक लाख पुस्तकों पर क्यूआर कोड की व्यवस्था तथा पुस्तकालय प्रबंधन प्रणाली को सुदृढ़ करने का कार्य किया जा रहा है।
डिजिटल पब्लिक लाइब्रेरी की यह पहल प्रयागराज के लिए विशेष महत्व रखती है। इससे न केवल विद्यार्थियों और शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री सुलभ होगी, बल्कि नई पीढ़ी में पठन-पाठन की रुचि भी बढ़ेगी। डिजिटल माध्यम युवाओं को तकनीक के साथ जोड़ते हुए ज्ञानार्जन के नए अवसर प्रदान करता है। विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस का संदेश भी यही है कि पुस्तकों के प्रति सम्मान, बौद्धिक संपदा के संरक्षण और ज्ञान के प्रसार को बढ़ावा दिया जाए। ऐसी पहलें न केवल शैक्षिक विकास को गति देती हैं, बल्कि समाज को ज्ञान-आधारित और जागरूक बनाने में भी सहायक सिद्ध होती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र