निराला और महादेवी की साहित्यिक नगरी में माफिया-आपराधिक तत्वों के खिलाफ काव्यात्मक विरोध के अभियान की शुरुआत
हिंदुस्तानी अकादमी में कवियों ने माफिया संस्कृति पर जम कर चलाए कविता के तीर, युवा शक्ति को रचनात्मक आयोजन से जोड़ने की पहल
बंदूक की जगह ब्रश, डर की जगह डायलॉग की मूलभावना से प्रेरित है अभियान, प्रदेश के सभी जिलों के प्रमुख शहरों में 14 अगस्त तक युवा करेंगे रचनात्मक आयोजन
विश्वविद्यालय और संगठक महाविद्यालयों में भी युवाओं के मन को पढ़ने के लिए आयोजित हुई रचनात्मक प्रतियोगिता
प्रयागराज, 11 अगस्त। साहित्य की राजधानी प्रयागराज में काव्य की धारा के माध्यम से युवाओं से जुड़ने और उनके मन की बात समझने की पहल हुई है। प्रदेश में युवाओं को रचनात्मक अभिव्यक्ति का मंच देने और माफिया राज व भय की संस्कृति फैलाने वालों के खिलाफ सकारात्मक संदेश देने के उद्देश्य से यहां 'रंग दे बसंती' अभियान की शुरुआत हुई है जो प्रदेश के विभिन्न शहरों में 14 अगस्त तक चलेगा।
अपराध और माफिया संस्कृति के खिलाफ काव्यात्मक विरोध के अभियान की शुरुआत
दिल्ली के जंतर मंतर पर जेन जी की सहभागिता के बाद देश में इस युवा पीढ़ी के मन को गहराइयों से समझने की कोशिश समाज के अलग अलग हिस्सों में हो रही है। सियासी पार्टियां एक तरफ जहां जेन जी से जुड़ने के लिए उनसे संवाद से जुड़े आयोजन कर रही हैं तो वहीं काव्य के माध्यम से भी इस विषय पर जेन जी से जुड़ने की पहल हुई । प्रयागराज की हिंदुस्तानी एकेडमी में "रंग दे बसंती अभियान" की मंगलवार से हुई शुरुआत भी उसी कड़ी का हिस्सा है। कार्यक्रम के संयोजक विश्वदीप शुक्ला का कहना है प्रयागराज ने साहित्य और चिंतन के माध्यम से हमेशा देश को रास्ता दिखाया है। वर्तमान में जेन की नई पीढ़ी से रचनात्मक दिशा में जुड़ने के लिए "रंग दे बसंती अभियान" की शुरुआत हुई है। इसमें जेन जी कवियों को आमंत्रित कर उन्हें अपनी काव्यात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम मन की बात कहने जा मंच प्रदान किया गया है। देश भर के अलग अलग हिस्सों से आए वीर रस और ओज रस के जेन जी के मन को पढ़ने वाले 8 कवियों ने इसमें अपनी अभिव्यक्ति का मंच प्रदान किया । निराला और महादेवी के साथ अपनी पहचान रखने वाले शहर की पहचान एक दशक पहले जिस तरह माफिया संस्कृति से होने लगी थी उसी अपराध और माफिया संस्कृति के खिलाफ यह काव्यात्मक विरोध का अभियान है।
कवियों ने अपराधी और माफियाओं की जमकर ली साहित्यिक क्लास
इस आयोजन में ओज और वीर रस की कविताओं के साथ अपनी पहचान रहने वाले युवा जेन जी कवियों को मंच प्रदान किया गया। दिल्ली यूनिवर्सिटी के संक्षेप बरनवाल, मध्यप्रदेश के अभिषेक अवस्थी, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की आकांक्षा बुन्देला, बिहार के मोरारी मण्डल और बलिया के बजरंग नाथ, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अभिजीत मिश्रा और डॉ मृत्यंजय परमार ने अपनी कविताएं पढ़ी । कार्यक्रम की अध्यक्षता गीतकार डॉ. विनम्र सेन सिंह ने की। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक आचार्य शांतनु जी महराज ने भी अपने विचार नई पीढ़ी के सामने रखे । डॉ विनम्र सेन का कहना है कि इस अभियान से 11 से 14 अगस्त तक प्रदेश के विभिन्न शहरों में कविता, कला, संगीत और संवाद के माध्यम से युवा रचनात्मकता के साथ अपनी बात रखेंगे। युवा संगठन 'रंग दे बसंती' के इस अभियान का उद्देश्य डर और दबाव की संस्कृति को नकारते हुए युवाओं को अभिव्यक्ति, रचनात्मकता व संवाद का मंच उपलब्ध कराना है।
प्रदेश के सभी जिलों में होगा आयोजन
प्रदेशव्यापी इस अभियान की शुरुआत प्रयागराज में आपराधिक संस्कृति फैलाने वालों के काव्यात्मक विरोध से होगी। संयोजक विश्वजीत शुक्ला का कहना है कि इसके बाद 12 अगस्त को लखनऊ में ग्रैफिटी वॉल का आयोजन होगा। जहां शहर के कलाकार माफिया के प्रभाव पर आधारित सार्वजनिक भित्ति चित्रों की लाइव पेंटिंग करेंगे। इसके जरिए कला को सामाजिक अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया जाएगा।
13 अगस्त को मुजफ्फरनगर में कॉमिक वितरण एवं संवाद कार्यक्रम होगा। सांप्रदायिक सद्भाव पर आधारित कॉमिक का वितरण किया जाएगा और स्कूलों में युवाओं के साथ संवाद सत्र होंगे। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर अभियान गीत 'डर से आजादी' को प्रदेश स्तर पर लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ रैप, संगीत और डिजिटल कला का समागम होगा।