पुलिस हिरासत में मौत के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष को उम्रकैद
आजमगढ़,04 फ़रवरी (हि.स.)। पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अदालत ने तत्कालीन थानाध्यक्ष को आजीवन कारावास तथा एक लाख पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने बुधवार को सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी मुकदमा जितेंद्र यादव निवासी दौलतपुर थाना मेंहनगर के पिता हरिलाल यादव को रानी की सराय थाने की पुलिस ने 29 मार्च 2003 को एक बैटरी चोरी के मुकदमे में हिरासत में लिया था। उसी रात हरिलाल के बारे में जानकारी होने पर जितेंद्र यादव अपने रिश्तेदार रामवचन यादव के साथ 29 मार्च को 2003 को थाने पर पहुंचा था।
जितेंद्र यादव के सामने ही पूछताछ के दौरान थानाध्यक्ष जे के सिंह के ललकारने पर दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह ने हरिलाल यादव को गोली मार दी। घायल हरिलाल यादव को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां हरिलाल यादव की मृत्यु हो गई। घटना के समय जितेंद्र यादव तथा रामवचन यादव को हवालात में बंद कर दिया गया।
घटना के दूसरे दिन 30 मार्च को कोतवाली में जितेंद्र की तहरीर पर यह मुकदमा दर्ज किया गया। उधर घटना के बाद इसी मामले में रानी की सराय थाने में हत्या का मुकदमा दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह के विरुद्ध पहले ही दर्ज कर लिया गया था,जिसके कारण शहर कोतवाली में दर्ज मुकदमे को रानी की सराय थाने में दर्ज मुकदमे में शामिल कर लिया गया। बाद में शासन ने सितंबर 2003 में इस मामले की जांच सीबी सीआईडी को सौंप दी। सीबीसी आईडी ने फरवरी 2005 में चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की। मुकदमे के दाैरान आरोपित दरोगा नरेंद्र बहादुर सिंह की मृत्यु हो गई।
अभियोजन पक्ष की तरफ से जिला शासकीय अधिवक्ता प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी तथा सहायक शासकीय अधिवक्ता दीपक कुमार मिश्रा ने कुल सात गवाहों को न्यायालय में परीक्षित कराया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपित तत्कालीन थानाध्यक्ष जे के सिंह को आजीवन कारावास तथा एक लाख पांच हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
हिन्दुस्थान समाचार / राजीव चौहान