आईआईटी कानपुर बनाएगा देश का पहला सीपीवी सन सिम्युलेटर : आशीष गर्ग

 


कानपुर, 30 सितंबर (हि.स.)। भारत के 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा को अपनाने के साथ उसकी जांच और परीक्षण की सुविधाएं भी देश में विकसित करनी होंगी। इसी दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर सीपीवी तकनीक के परीक्षण के लिए देश का पहला सन सिम्युलेटर विकसित करेगा।

यह बातें बुधवार को आईआईटी कानपुर के सतत ऊर्जा अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर आशीष गर्ग ने कही। आईआईटी कानपुर ने बेंगलुरु की नेक्सपीवी एनर्जी सिस्टम्स के साथ इस संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। परियोजना आईआईटी कानपुर के अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी पार्क फाउंडेशन (टेक्नोपार्क) की सदस्य कंपनी इनवेरिएंस ऑटोमेशन के सहयोग से आगे बढ़ाई जाएगी। इसके तहत देश में ही संकेंद्रित फोटोवोल्टिक यानी सीपीवी मॉड्यूल की जांच और उनकी क्षमता का आकलन करने के लिए विशेष सुविधा तैयार की जाएगी। वर्तमान में देश में उत्पादन के अंतिम चरण में सीपीवी मॉड्यूल की जांच के लिए इस तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

परियोजना का नेतृत्व सतत ऊर्जा अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर आशीष गर्ग और उनकी टीम कर रही है। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी नई तकनीकों को प्रयोगशाला से निकालकर बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुंचाने में मदद करना है। साथ ही, इसके जरिए उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच स्वदेशी तकनीक के विकास के लिए सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

सीपीवी तकनीक में लेंस के माध्यम से सूर्य की रोशनी को छोटी और अधिक क्षमता वाली सौर सेलों पर केंद्रित किया जाता है। इन सेलों में अर्धचालक की कई परतें एक के ऊपर एक होती हैं। प्रत्येक परत सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्से को ग्रहण करती है। सीपीवी में सौर सेल पूरे पैनल के करीब 0.1 प्रतिशत हिस्से में होते हैं। इससे सामान्य सौर पैनलों की तुलना में सेलों के लिए जरूरी जगह करीब 99 प्रतिशत तक कम हो जाती है।

नेक्सपीवी एनर्जी सिस्टम्स के निदेशक चिदानंद मूर्ति आर. ने बताया कि भारत की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 168 गीगावाट से अधिक हो चुकी है, लेकिन सौर सेल का घरेलू उत्पादन मॉड्यूल की तुलना में अभी कम है। सौर सेल से जुड़े अनिवार्य प्रावधान लागू होने के बाद घरेलू उत्पादन की क्षमता बढ़ाना और जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा कि सीपीवी प्रणालियों में सामान्य सौर पैनलों की तुलना में सेलों के लिए एक प्रतिशत से भी कम जगह की जरूरत होती है और प्रणाली लगाने के लिए भी लगभग आधी जगह पर्याप्त हो सकती है। इससे सीधे सूर्य की रोशनी वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के लिए नया विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

मौजूदा सूर्य सिम्युलेटर सामान्य सौर पैनलों के परीक्षण के लिए बनाए गए हैं, जबकि सीपीवी मॉड्यूल केवल सीधी और समानांतर सूर्य की रोशनी में काम करते हैं। इनमें रोशनी के कोण और सूर्य के प्रकाश के अलग-अलग हिस्सों के संतुलन का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। आईआईटी कानपुर की टीम इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखकर सिम्युलेटर विकसित करेगी। आगे इनवेरिएंस ऑटोमेशन इस तकनीक को शुरुआती नमूने से उत्पादन स्तर तक पहुंचाने में प्रमुख निर्माण साझेदार की भूमिका निभाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप