रक्षा क्षेत्र के लिए मानव-केंद्रित डिजाइन महत्वपूर्ण, इससे उपकरणों का इस्तेमाल आसान होगा : प्रो. जयन्धरन जी. राव

 


कानपुर, 11 सितंबर (हि.स.)। रक्षा प्रणालियों में मानव-केंद्रित डिजाइन को अपनाना महत्वपूर्ण है। इससे जटिल रक्षा उपकरणों और प्रणालियों का इस्तेमाल सैनिकों और रक्षा कर्मियों के लिए आसान होगा और उनकी परिचालन क्षमता बेहतर होगी। यह बातें शुक्रवार को आईआईटी कानपुर के अनुसंधान एवं विकास डीन प्रो. जयन्धरन जी. राव ने आईआईटी कानपुर और डीआरडीओ के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान कहीं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के डिजाइन विभाग स्थित ह्यूमन फैक्टर्स एंड सोशियोटेक्निकल सिस्टम्स (एचएफएसएस) स्टूडियो ने डीआरडीओ के सहयोग से रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाले इंटरफेस के लिए ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन (एचएमआई) डिजाइन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार प्रणालियों से जुड़ी डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. विवेक कांत ने किया।

प्रशिक्षण में ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन, इंटरफेस डिजाइन और मिशन के लिए महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों की उपयोगिता का मूल्यांकन करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को ऐसे इंटरफेस तैयार करने के तरीके बताए गए, जिन्हें भारतीय सैनिक और रक्षा कर्मी फील्ड ऑपरेशन के दौरान आसानी से इस्तेमाल कर सकें। प्रशिक्षण में बताया गया कि बेहतर इंटरफेस से जटिल उपकरणों का संचालन सरल होने के साथ सैनिकों के प्रशिक्षण में लगने वाला समय भी कम किया जा सकता है।

कक्षा सत्रों में एचएमआई की डिजाइन प्रक्रिया, इसके सिद्धांतों और विभिन्न फ्रेमवर्क की जानकारी दी गई। इसके बाद एचएफएसएस स्टूडियो में व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए, जहां प्रतिभागियों ने संबंधित तरीकों और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर जटिल रक्षा प्रणालियों के लिए उपयोग में आसान डिजाइन तैयार किए। प्रशिक्षण कार्यक्रम आईआईटी कानपुर परिसर में तीन दिनों तक चला।

समापन समारोह में डीजी, ईसीएस कार्यालय के आउटस्टैंडिंग साइंटिस्ट एवं निदेशक (प्रशासन) प्रभाकर राव गोमकर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। डीआरडीओ की एलआरडीई के साइंटिस्ट जी श्री एस. डी. सुरेश मुख्य अतिथि रहे। प्रतिभागियों और अतिथियों ने रक्षा प्रणालियों के विकास में अंतिम उपयोगकर्ता की जरूरतों को ध्यान में रखने पर जोर दिया।

आईआईटी कानपुर का एचएफएसएस स्टूडियो ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन, ह्यूमन फैक्टर्स और सिस्टम्स के क्षेत्र में काम करता है। स्टूडियो जटिल सामाजिक-तकनीकी प्रणालियों के लिए मानव-केंद्रित डिजाइन को बढ़ावा देने के साथ भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण से जुड़े अनुप्रयोगों पर भी काम करता है। भविष्य में डीआरडीओ और भारतीय सेना के साथ एचएमआई पर ऐसे और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप