बागवानी आधारित खेती अपनाकर किसान बढ़ा सकते हैं अपनी आय : डॉ. अरुण कुमार सिंह
कानपुर, 25 जून (हि.स.)। फलदार वृक्षों और बागवानी आधारित खेती को अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी को शामिल करने से पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। यह बातें गुरुवार को उद्यान वैज्ञानिक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहीं।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, दिलीप नगर में एफओएम योजनांतर्गत दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। जैविक कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रशिक्षण में क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के पहले सत्र में किसानों के साथ संवाद कर कृषि क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा की गई। किसानों ने मिट्टी की घटती उर्वरता, बढ़ती उत्पादन लागत, कीट एवं रोग प्रबंधन, फसलों की गुणवत्ता तथा बाजार संबंधी समस्याओं को प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने रखा।
डॉ. अरुण कुमार सिंह ने किसानों को बागवानी आधारित कृषि के लाभ बताते हुए कहा कि खेत को वर्षभर उत्पादक बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने किसानों को फलदार वृक्षों को खेती का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने मुख्य फसलों के साथ सब्जी उत्पादन, बागवानी, दलहनी फसलों तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि खेत का प्रत्येक हिस्सा और हर मौसम आय बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
डॉ. दीपक मिश्रा ने जैविक कृषि के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। वहीं पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत ने बरसात के मौसम में पशुपालन प्रबंधन संबंधी जानकारी दी।
कार्यक्रम में महिला किसानों सहित अन्य प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभव साझा किए और जैविक खाद तथा प्राकृतिक खेती को अपनाने का संकल्प लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप