समग्र स्वास्थ्य ही असली स्वस्थता, विद्यार्थियों को मिला मार्गदर्शन : डॉ. संगीता सारस्वत

 


कानपुर, 10 अप्रैल (हि.स.)। व्यक्ति तभी पूर्ण रूप से स्वस्थ माना जाता है जब वह शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से संतुलित हो। केवल रोग का अभाव ही स्वास्थ्य नहीं है। संतुलित आहार, दिनचर्या और सकारात्मक सोच से ही समग्र स्वास्थ्य संभव है। विद्यार्थियों को अनुशासन और संयम का पालन करना चाहिए। यह बातें शुक्रवार को वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता सारस्वत ने कही।

ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, जवाहर नगर में ‘किशोरों की समस्याएं एवं समाधान’ विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता सारस्वत ने नौ और 10 अप्रैल को छात्र-छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

कार्यशाला के दौरान उन्होंने समग्र स्वास्थ्य की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि जीवन में संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और योग-व्यायाम का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि तनाव, चिंता और नकारात्मक विचार कई बीमारियों की जड़ होते हैं, इसलिए विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच अपनानी चाहिए।

उन्होंने आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धति का उल्लेख करते हुए बताया कि शरीर में कफ, पित्त और वात का संतुलन बिगड़ने से बीमारियां उत्पन्न होती हैं, वहीं मानसिक तनाव भी शारीरिक रोगों का कारण बनता है। उन्हाेंने विद्यार्थियों को अनुशासित जीवनशैली अपनाने, समय प्रबंधन करने और नियमित योग-प्राणायाम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि संतुलित और सात्विक भोजन, पर्याप्त नींद और सकारात्मक वातावरण से व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास संभव है।

कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने विश्व कल्याण के लिए विश्व नवकार महामंत्र का जप भी किया। विद्यालय की प्रबंध निदेशक डॉ. पूजा अवस्थी ने मुख्य अतिथि का परिचय कराया, जबकि प्रधानाचार्य राम मिलन सिंह, उपप्रधानाचार्य आकांक्षा जौहरी और शिवानी सिंह ने स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन छात्र संसद के उप प्रधानमंत्री आशुतोष शुक्ला ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप