वैज्ञानिक सोच और शोध की रुचि विकसित करने में प्रो. हरीश चंद्र का योगदान प्रेरणादायी : कुलपति
कानपुर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। महान गणितज्ञ प्रो. हरीश चंद्र का गणित और सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में योगदान आज भी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनकी उपलब्धियों से नई पीढ़ी को परिचित कराना वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह बात छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने शनिवार को उनकी 103वीं जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के शुभारंभ के दौरान कही।
विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज की ओर से ‘हरीश चंद्र की विरासत: गणित एवं भौतिकी का उत्सव’ विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के निदेशक प्रो. आरके द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने प्रो. हरीश चंद्र के जीवन, शैक्षणिक यात्रा और गणित व सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान की जानकारी दी।
कार्यशाला के दौरान प्रो. हरीश चंद्र के जीवन और उपलब्धियों पर आधारित वेबसाइट का लोकार्पण किया गया। इसे एमएससी गणित के विद्यार्थी हर्षित राम गुप्ता ने तैयार किया है। वेबसाइट के माध्यम से विद्यार्थी और शोधार्थी महान गणितज्ञ के जीवन, शोध और वैज्ञानिक योगदान से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इसके बाद उनके जीवन और उपलब्धियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इसके जरिए प्रतिभागियों को उनके प्रेरणादायी जीवन और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय पर उनके प्रभाव को जानने का अवसर मिला।
एचबीटीयू के प्रो. एपी द्विवेदी ने हरीश चंद्र अनुसंधान संस्थान (एचआरआई) की स्थापना के लिए कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की पहल और प्रयासों की सराहना की। उन्होंने गणित और भौतिक विज्ञान में उत्कृष्ट अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए संस्थागत प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि एचआरआई के गणित विभाग के रीडर प्रो. तुहिन घोष रहे, जबकि एचआरआई के प्रोफेसर एवं डीन (प्रशासन) प्रो. आर. थंगादुरई विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। वीएसएसडी कॉलेज के प्रो. टीएन त्रिवेदी और एचबीटीयू के प्रो. एपी द्विवेदी भी मौजूद रहे।
कार्यशाला के पहले दिन प्रो. तुहिन घोष ने ‘मैथमेटिकल इनवर्स प्रॉब्लम्स—एन एक्सपोजिटरी डिस्कोर्स’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने गणितीय प्रतिलोम समस्याओं की अवधारणा और वैज्ञानिक अनुसंधान सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके अनुप्रयोगों की जानकारी दी। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को गणित की उन्नत अवधारणाओं को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में स्कूल की सह निदेशक प्रो. अंजू दीक्षित, डॉ. पीएन पाठक समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप