जीएसटी आर्थिक दक्षता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण साधन: प्रो. सत्यकाम

 


-मुक्त विवि में जीएसटी सुधारों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए शोध पत्र आमंत्रित

- प्रो. देवेश रंजन त्रिपाठी बने संयोजक, वेबसाइट पर पंजीकरण प्रारम्भ

प्रयागराज, 06 अप्रैल (हि.स)। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों के सामाजिक, आर्थिक प्रभावों, नीति निर्माण और शैक्षणिक विमर्श को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में भारत सरकार की ओर से जीएसटी 2.0 सुधारों को जन- जन तक पहुंचाने के लिए 8 मई को एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया जा रहा है।

दूरस्थ शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने सोमवार को बताया कि यह पहल देश के जीएसटी सुधारों को समझने, क्रियान्वित करने और उनके प्रभावों का विश्लेषण कर आवश्यक सुझावों को एकत्रित कर नीति निर्माताओं के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए है।

कुलपति ने कहा कि भारत का एकीकृत कर प्रणाली की ओर बढ़ना स्वतंत्रता के बाद से हुए सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय परिवर्तनों में से एक है। भारत ‘विकसित भारत 2047’ की आकांक्षा रखता है। ऐसे में जीएसटी समावेशी विकास, राजकोषीय सुदृढ़ी करण और आर्थिक दक्षता प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण साधन है। इस सुधार ने औपचारिक अर्थव्यवस्था के विस्तार, डिजिटलीकरण के माध्यम से कर अनुपालन में सुधार और अंतर-राज्यीय व्यापार को बढ़ावा देने में योगदान दिया है। हालांकि, कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं जैसे कि कर दर युक्तिकरण, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए अनुपालन की जटिलता और राज्य राजस्व प्रदर्शन में असमानताएं, जिनका समाधान भारत विकास के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए आवश्यक है।

प्रोफेसर सत्यकाम ने बताया कि यह संगोष्ठी चार्टर्ड लेखाकारों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, निवेशकों और उद्योग विशेषज्ञों को भारत के दीर्घकालिक विकासात्मक रोडमैप के संदर्भ में जीएसटी सुधारों के बहुआयामी प्रभाव पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करेगी। उन्होंने बताया, संगोष्ठी में डिजिटल परिवर्तन, राजकोषीय संघवाद और पारदर्शिता को बढ़ावा देने में कर पेशेवरों की भूमिका पर गहन चर्चा की जाएगी।

मुक्त विवि के जनसंपर्क अधिकारी डॉ प्रभात चन्द्र मिश्र ने बताया कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण का समर्थन करने वाली व्यावहारिक नीतिगत सिफारिशें विकसित करना इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि इस सेमिनार आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के प्रबंधन विद्या शाखा के आचार्य प्रोफेसर देवेश रंजन त्रिपाठी को संयोजक नामित किया गया है। प्रो त्रिपाठी ने उच्च शिक्षा से जुड़े सभी प्राध्यापकों, शोधार्थियों तथा छात्रों को आईसीएसएसआर के सहयोग से इस राष्ट्रीय सेमिनार में प्रतिभाग करने के लिए आमंत्रित किया है। सेमिनार का सम्पूर्ण विवरण एवं पंजीकरण प्रारूप मुक्त विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जा चुका है।

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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र