हरित ऊर्जा आधारित कृषि से किसानों की आय बढ़ने की संभावना, एग्रीवोल्टाइक तकनीक पर जोर : डॉ. एन. के. शर्मा
कानपुर, 24 अप्रैल (हि.स.)। हरित ऊर्जा आधारित कृषि को भविष्य की मजबूत दिशा बताया गया है। कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग पर जोर दिया गया। किसानों को ऊर्जा उत्पादन में भी भागीदार बनाने की आवश्यकता बताई गई। एग्रीवोल्टाइक तकनीक से किसानों की आय बढ़ने की संभावना जताई गई। यह बातें शुक्रवार को डॉ. एन. के. शर्मा ने कहीं।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) कानपुर के कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एन. के. शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हरित ऊर्जा आधारित कृषि पर अपने विचार प्रस्तुत किए। 22 एवं 23 अप्रैल को बेंगलुरु में आयोजित 15वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने वर्चुअल रूप से मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया और अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के समक्ष उभरती चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रैंसमवेयर जैसे साइबर खतरों पर भी चर्चा की और डिजिटल सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता बताई।
इसके अलावा 23 अप्रैल को आयोजित 30 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय विंटर स्कूल ट्रेनिंग कार्यक्रम में उन्होंने आमंत्रित वक्ता के रूप में ऑनलाइन प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम में राज्यपालों की अध्यक्षता रही। अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग अब आवश्यक हो गया है। सौर पंपों की स्थापना से किसानों की ऊर्जा निर्भरता कम हो रही है।
उन्होंने बताया कि एग्रीवोल्टाइक तकनीक से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह उन्हें ऊर्जा उत्पादक बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को हरित ऊर्जा तकनीकों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता के प्रति आभार व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / मो0 महमूद