मेडिकल स्टोर पर कैमरे लगाने का प्रस्ताव वापस ले सरकार : प्रवीन कुमार बाजपेयी
कानपुर, 18 अक्टूबर (हि.स.)। मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और तीन महीने तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की अनिवार्यता से दवा व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और उत्पीड़न की आशंका रहेगी। सरकार को इस प्रस्ताव को वापस लेना चाहिए। यह बातें रविवार को फुटकर दवा व्यापार मंडल, कानपुर के महामंत्री प्रवीन कुमार बाजपेयी ने कहीं।
सिविल लाइंस स्थित मर्चेंट चैंबर हॉल में आज रिटेल केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश, दवा व्यापार मंडल (थोक) और फुटकर दवा व्यापार मंडल कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में केमिस्ट आक्रोश सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए दवा व्यापारियों ने एकजुटता दिखाई।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आठ सितंबर को औषधि नियम, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया था। इसमें फुटकर दवा दुकानों पर सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था लगाने और तीन महीने तक रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का प्रावधान प्रस्तावित है। इस मसौदे पर 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। संगठन के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 45 से अधिक जिलों के दवा व्यापारियों ने ईमेल और डाक से विरोध दर्ज कराया है। कानपुर से भी सैकड़ों आपत्तियां भेजी गई हैं।
व्यापारियों का कहना है कि कैमरे लगाने, रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और उपकरणों के रखरखाव पर होने वाला खर्च छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। बिजली बाधित होने, इंटरनेट बंद होने या हार्ड डिस्क खराब होने से रिकॉर्डिंग प्रभावित होने पर भी कार्रवाई का खतरा रहेगा। संगठन ने आशंका जताई कि नियमों के पालन के नाम पर दवा निरीक्षकों और अन्य अधिकारियों के जरिए उत्पीड़न तथा अवैध वसूली बढ़ सकती है। दवा लेने आने वाले मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी संवेदनशील होने के कारण उनकी निजता प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई।
ज्ञापन में शेड्यूल एच, एच-1 और एनआरएक्स श्रेणी की दवाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ये चिकित्सक के पर्चे पर दी जाती हैं और इनकी खुराक भी डॉक्टर तय करते हैं। संगठन ने सवाल उठाया कि केवल सीसीटीवी लगाने से इन दवाओं के दुरुपयोग पर कैसे रोक लगेगी।
मीडिया प्रभारी सुमित पावा ने कहा कि दवा व्यापारियों की समस्याओं और ग्राहकों की निजता को ध्यान में रखते हुए सरकार को इस प्रस्ताव पर दोबारा विचार करना चाहिए। नियम लागू होने से छोटे दवा कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
आगे उन्होंने बताया कि सम्मेलन में संगठन ने कानपुर के 6,500 फुटकर और 2,000 से अधिक थोक दवा व्यापारियों की भागीदारी का दावा किया। आंदोलन के अगले चरण में प्रतिनिधिमंडल सांसद रमेश अवस्थी को ज्ञापन सौंपकर उनसे केंद्र सरकार तक विरोध पहुंचाने का आग्रह करेगा। दवा खरीद में यूपीआई भुगतान पर अधिभार लगाने के मुद्दे का भी विरोध किया गया। संगठन ने मांगें नहीं माने जाने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप