स्वस्थ बेटी ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला : राज्यपाल
लखनऊ, 21 जुलाई (हि.स.)। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा मंगलवार को स्वामी कल्याण देव चिकित्सालय के सहयोग से मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत सर्वाइकल कैंसर जागरूकता एवं एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि स्वस्थ बेटी ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और विकसित राष्ट्र की आधारशिला है। बालिकाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता, समय पर स्वास्थ्य परीक्षण एवं टीकाकरण के माध्यम से अनेक गंभीर बीमारियों की प्रभावी रोकथाम संभव है।
उन्होंने कहा कि डरिए मत, यह वैक्सीन आपकी सुरक्षा के लिए है। जानकारी के अभाव में कई बार लोग टीकाकरण को लेकर अनावश्यक आशंकाएं पाल लेते हैं, जबकि वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि एचपीवी वैक्सीन भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करने में प्रभावी एवं सुरक्षित है। उन्होंने अभिभावकों को बिना किसी भ्रांति या भय के अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण कराने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि मां अपने बच्चों के लिए सबसे बड़ी शक्ति होती है और आवश्यकता पड़ने पर उनकी सुरक्षा के लिए हर चुनौती का सामना कर सकती है। प्रत्येक माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपनी बेटियों के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें तथा उन्हें समय पर आवश्यक टीकाकरण उपलब्ध कराएं। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों के अनुसार 9 से 14 वर्ष की आयु में एचपीवी टीकाकरण सर्वाधिक प्रभावी माना जाता है, क्योंकि इस आयु में बेहतर प्रतिरक्षा विकसित होती है और भविष्य में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
बीमारी का उपचार महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण उसकी रोकथाम है। यदि समाज जागरूक होगा, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराएगा तथा समय पर टीकाकरण अपनाएगा, तो अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने छात्राओं से अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा परिवार और समाज में भी स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया।
उन्होंने अपने महत्वाकांक्षी मां-बेटी संवाद अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार में मां और बेटी के बीच सशक्त संवाद ही स्वस्थ, सुरक्षित और आत्मविश्वासी समाज की नींव है। माताएं अपनी बेटियों से स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, स्वच्छता, मासिक धर्म स्वास्थ्य तथा जीवन मूल्यों से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा करें। उन्होंने बताया कि उनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा मां-बेटी संवाद अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य परीक्षण, परामर्श, जागरूकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य शिविर तथा महिला सशक्तीकरण से संबंधित विभिन्न गतिविधियों का निरंतर आयोजन किया जा रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय