वैश्विक अनुसंधान अवसरों से शोधकर्ताओं काे मिलती है मदद : डॉ. संजीव कुमार वर्ष्णेय

 


कानपुर, 17 मार्च (हि.स.)। वैश्विक अनुसंधान अवसरों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से छात्रों और शुरुआती शोधकर्ताओं को न केवल अपने ज्ञान और कौशल को विकसित करने में मदद मिलती है, बल्कि यह देश में अनुसंधान और नवाचार की गुणवत्ता को भी बढ़ाता है। हमें युवाओं को प्रेरित करना चाहिए कि वे प्रभावशाली शोध प्रश्नों की पहचान करें और मजबूत शोध प्रस्ताव तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसरों का लाभ उठाएं, यह बातें मंगलवार को पूर्व प्रमुख, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग डॉ. संजीव कुमार वर्ष्णेय ने कही।

पीजी अकादमिक्स एंड करियर काउंसिल, स्टूडेंट्स जिमखाना, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर, द्वारा लेक्चर हॉल–16 में “वैश्विक अनुसंधान अवसर: फेलोशिप, अनुदान एवं सहयोग” विषय पर एक ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में छात्रों और शोधकर्ताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप, अनुदान और सहयोग के अवसरों से अवगत कराया गया। सत्र की शुरुआत प्रो. राघवेन्द्र चौधरी, फैकल्टी एडवाइजर के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद प्रो. सुनील के. मिश्रा, महासचिव, विज्ञान भारती (ब्रह्मावर्त प्रांत) ने संगठन का परिचय दिया और युवाओं को “मनन से अनुसंधान” की भावना अपनाने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य व्याख्यान में डॉ. संजीव कुमार वर्ष्णेय ने राष्ट्रीय फेलोशिप्स जैसे एनएआरएफ, डीएसटी, डीबीटी, एआईसीटीई तथा अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप्स जैसे फुलब्राइट-नेहरू, फुलब्राइट-कलाम, डीएएडी, काउस्ट, गेट्स कैम्ब्रिज और कॉमनवेल्थ फेलोशिप्स की जानकारी दी। साथ ही पोस्ट-डॉक्टोरल अवसर और भारत सरकार के समर्थन कार्यक्रम जैसे पीएम-ईसीआरजी, रामानुजन फेलोशिप और इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप पर भी प्रकाश डाला।

सत्र में छात्रों, शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई। आयोजकों ने डॉ. वर्ष्णेय और विज्ञान भारती टीम के बहुमूल्य सहयोग की सराहना की। इस कार्यक्रम ने वैश्विक अनुसंधान अवसरों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को स्पष्ट किया और छात्रों को अपने शोध करियर को नई दिशा देने के लिए प्रेरित किया।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप