'गर्भ संस्कार' भविष्य की नींव : डॉ प्रज्ञा सक्सेना
सुलतानपुर, 19 अप्रैल (हि.स.)। अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित 'गर्भोत्सव' कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. प्रज्ञा सक्सेना ने वैज्ञानिक शोधों का हवाला देते हुए कहा कि शिशु के मस्तिष्क का 80 प्रतिशत विकास गर्भ के भीतर ही हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान माँ के विचार, खान-पान, आचरण और भावनाओं का सीधा प्रभाव बच्चे के व्यक्तित्व पर पड़ता है। ऋषियों की प्राचीन परंपरा और आधुनिक विज्ञान, दोनों ही 'गर्भ संस्कार' को भविष्य की नींव मानते हैं।
उत्तर प्रदेश में सुलतानपुर के पं. राम नरेश त्रिपाठी सभागार में रविवार को अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा एक विशेष 'गर्भोत्सव' कार्यक्रम आयोजित किया गया। गायत्री परिवार वर्ष 2016 से 'आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी' अभियान चला रहा है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाना और स्वस्थ समाज की नींव रखना था। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं को गर्भस्थ शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास के प्रति जागरूक किया गया।
डॉ. प्रज्ञा ने वर्तमान समाज में बढ़ते अनाचार और युवाओं के भटकाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि हम चाहते हैं कि आने वाली संतानें संस्कारी और सामर्थ्यवान हों, तो माता-पिता, विशेषकर माताओं को गर्भावस्था के दौरान ही सचेत होना होगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को नौ महीने के खान-पान और सकारात्मक वातावरण के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में केवल गर्भवती महिलाएं ही नहीं, बल्कि विवाहित युवाओं को भी आमंत्रित किया गया। उन्हें बताया गया कि संतान के जन्म से पूर्व ही माता-पिता का चिंतन और व्यवहार कैसा होना चाहिए, क्योंकि बीजारोपण के समय की परिस्थितियाँ भी बच्चे के भविष्य को प्रभावित करती हैं। डॉ. प्रज्ञा ने कहा, नारी के पास सृजन की शक्ति है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नारी को उसकी इसी शक्ति से परिचित कराना है ताकि वह एक उत्कृष्ट समाज का निर्माण कर सके।
इस अवसर पर गायत्री परिवार के कई पदाधिकारी, स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं उपस्थित रहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दयाशंकर गुप्त