गुर्दा रोग से माइग्रेन तक, विशेषज्ञों ने बताए आधुनिक इलाज के नए आयाम
कानपुर, 14 जून (हि.स.)। रोगों की समय पर पहचान और आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी चिकित्सकों तक पहुंचाना बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह बातें रविवार को गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. वीके मिश्रा ने कही।
गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल की ओर से आयोजित द्वितीय क्लिनिकल अपडेट कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने चिकित्सा विज्ञान में हो रहे नवीनतम शोध, तकनीकी प्रगति और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में कानपुर और लखनऊ समेत विभिन्न शहरों के बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने भाग लिया।
कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य चिकित्सकों को चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों और नई उपचार तकनीकों से अवगत कराना था, ताकि मरीजों को बेहतर और प्रभावी चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। कार्यक्रम के दौरान गुर्दा रोग, रूमेटाइड आर्थराइटिस, स्लीप एपनिया, पैंक्रियाटाइटिस, मोटापा और माइग्रेन जैसी जटिल बीमारियों के निदान एवं उपचार के नवीनतम तरीकों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।
टेंडर पाम सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार ने गुर्दे की बीमारियों, बढ़ते यूरिक एसिड और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए समय पर जांच और उपचार की आवश्यकता बताई। वहीं अपोलो सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के इम्यूनोलॉजी एवं रूमेटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपम वाखलू ने रूमेटाइड आर्थराइटिस के शुरुआती लक्षणों, उसके प्रभाव और आधुनिक चिकित्सा के माध्यम से बेहतर नियंत्रण की संभावनाओं पर चर्चा की।
केजीएमयू लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत ने स्लीप एपनिया को गंभीर स्वास्थ्य समस्या बताते हुए इसके कारणों, जोखिमों और उपलब्ध उपचार विकल्पों की जानकारी दी। मैक्स सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल लखनऊ के वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सुहांग वर्मा ने पैंक्रियास में होने वाली सूजन की समय रहते पहचान और उसके आधुनिक उपचार पर विस्तृत प्रस्तुति दी।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर की एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. खुशबू अग्रवाल ने बढ़ते मोटापे को कई गंभीर बीमारियों की जड़ बताते हुए जीवनशैली में बदलाव और नई दवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. स्वांशु बत्रा ने माइग्रेन, विशेषकर वेस्टिबुलर माइग्रेन के लक्षणों और उपचार संबंधी नवीन जानकारियां साझा कीं। विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती जीवनशैली और बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए समय पर जांच और सही उपचार बेहद आवश्यक है।
कार्यक्रम का शुभारंभ गैस्ट्रो लिवर हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. वी.के. मिश्रा ने अतिथि चिकित्सकों के स्वागत के साथ किया। इस अवसर पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. संजय काला, मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा गिरी सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजना यादव ने किया, जबकि डॉ. शुभ्रा मिश्रा एवं डॉ. श्रीपद ने अतिथि वक्ताओं का स्वागत किया। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों और चिकित्सकों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद भी हुआ, जिससे नवीन चिकित्सा ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान संभव हो सका।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप