खेत तालाब में अब चमकेगा मीठे पानी का मोती, किसानों की होगी मोटी कमाई : आर.पी. कुशवाहा

 


-कानपुर में तय हुआ 15 खेत तालाबों का लक्ष्य, लागत का 40 प्रतिशत मिलेगा सरकारी अनुदान-तालाब की खुदाई से लेकर पम्पिंगसेट खरीदने तक पर योगी सरकार दे रही भारी छूट-पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर पोर्टल पर होगी बुकिंग, ज़्यादा आवेदन पर ई-लॉटरी

कानपुर, 27 मई (हि.स.)। प्रदेश सरकार की खेत तालाब योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध अप्रयुक्त भूमि का सही इस्तेमाल करना और किसानों की आय को बढ़ाना है। कानपुर के प्रगतिशील किसानों के लिए यह बहुत ही मुनाफे का सौदा है क्योंकि इसमें तकनीकी सहायता से लेकर आर्थिक मदद तक सब कुछ सरकार दे रही है। इच्छुक किसान बिना किसी देरी के मत्स्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी बुकिंग सुरक्षित कर लें। यदि तय लक्ष्य से अधिक आवेदन आते हैं, तो लाभार्थियों का चयन पूरी तरह पारदर्शी ई-लॉटरी व्यवस्था के जरिए किया जाएगा। यह बातें बुधवार को भूमि संरक्षण अधिकारी आर.पी. कुशवाहा ने कही।

अगर आपके पास खेत में छोटा सा तालाब है या आप नया तालाब बनवाने की सोच रहे हैं, तो योगी सरकार आपके लिए कमाई का एक शानदार मौका लेकर आई है। सरकार की नीति के तहत अब कानपुर के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ मोतियों की कमर्शियल खेती यानी पर्ल फार्मिंग से जोड़ा जा रहा है। इसके लिए कानपुर जिले में पहले चरण के लिए 15 खेत तालाबों का एक विशेष लक्ष्य तय किया गया है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसानों को सीप पालने के तकनीकी झंझटों से परेशान नहीं होना पड़ेगा। सीप कहाँ से आएंगे, उनकी सर्जरी कैसे होगी और उनके अंदर मोती का दाना यानी न्यूक्लियस कैसे डाला जाएगा, यह सारा तकनीकी काम सरकारी एक्सपर्ट खुद अपनी देखरेख में कराएंगे।

सरकार ने इस योजना के खर्च और मुनाफे का पूरा हिसाब-किताब भी साफ कर दिया है। अगर आपके पास 440 वर्ग मीटर का एक छोटा खेत तालाब है, जिसमें साल भर कम से कम डेढ़ मीटर पानी रुकता हो, तो आप इस योजना का लाभ ले सकते हैं। इस छोटे तालाब में कुल 2,000 सीप डाले जाएंगे। सीप खरीदने, उनकी सर्जरी कराने, फीड यानी चारा और ऑक्सीजन सेट आदि को मिलाकर कुल डेढ़ लाख रुपए का खर्च आएगा। इस कुल लागत पर सरकार की तरफ से 40 प्रतिशत का सीधा अनुदान यानी सब्सिडी दी जाएगी, जबकि प्राथमिकता वाले कुछ विशेष लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक की छूट का लाभ भी मिल सकता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर तालाब में 60 प्रतिशत सीप भी सही-सलामत बच जाते हैं, तो आराम से 2,400 मोती तैयार हो जाएंगे। बाजार में एक मोती कम से कम 100 रुपये का बिकता है, जिससे कुल दो लाख चालीस हजार रुपये की बिक्री होगी। इस तरह सारा खर्च निकालने के बाद किसान को एक फसल में करीब नब्बे हजार रुपये का सीधा शुद्ध मुनाफा होगा।सरकार केवल मोती पालन पर ही नहीं, बल्कि तालाब तैयार करने और सिंचाई की मशीनरी पर भी दिल खोलकर मदद दे रही है। जो किसान अपने खेत में नया तालाब खुदवाना चाहते हैं, उन्हें तालाब खुदाई के काम पर लागत का 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 52,500 रुपये की सरकारी मदद मिलेगी। इसके साथ ही, तालाब में पानी भरने और सिंचाई की व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए यदि किसान पंपिंगसेट खरीदता है, तो उसे मशीन की कीमत पर 50 प्रतिशत की छूट यानी अधिकतम 15,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा। मोती की अच्छी क्वालिटी के लिए तालाब में महुआ की खली, चूना या किसी भी तरह के घातक केमिकल और कीटनाशकों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद रहेगा। इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि किसान इस शुद्ध पानी में मोती के साथ-साथ बिना किसी केमिकल के मछली पालन भी कर सकेंगे और डबल कमाई कर पाएंगे।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को किसी दफ्तर के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है। योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक किसानों को आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल agriculture.up.gov.in पर जाकर अपनी बुकिंग या आवेदन दर्ज करना होगा। यदि कानपुर में तय किए गए 15 तालाबों के लक्ष्य से ज़्यादा आवेदन आ जाते हैं, तो किसी भी तरह के पक्षपात से बचने के लिए कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन ई-लॉटरी सिस्टम चलाया जाएगा। लॉटरी में जिन किसानों का नाम निकलेगा, उन्हें पारदर्शी तरीके से लाभार्थी चुन लिया जाएगा। यह योजना बैक-एंडेड है, यानी काम पूरा होने और अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर फोटो के साथ वेरिफिकेशन करने के बाद सब्सिडी का पूरा पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

मुख्य बातें -

कानपुर का लक्ष्य: प्रथम चरण में कुल 15 खेत तालाबों का चयन।

मोती पालन पर सब्सिडी : कुल लागत का 40 प्रतिशत (विशेष श्रेणी में 90 प्रतिशत तक) सरकारी अनुदान।

तालाब खुदाई पर छूट: लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम ₹52,500 की आर्थिक मदद।

पम्पिंगसेट पर सहायता: सिंचाई मशीन खरीदने पर 50 प्रतिशत या अधिकतम 15,000 रुपए की छूट।

लागत और कमाई : 1.50 लाख रुपए की लागत में 90,000 रुपए का सीधा शुद्ध मुनाफा।

चयन का तरीका : ऑनलाइन पोर्टल पर बुकिंग और लक्ष्य से अधिक आवेदन पर कंप्यूटर द्वारा पारदर्शी ई-लॉटरी

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप