लोकतांत्रिक चेतना से ही कायम है भारत की एकता व अखंडता : डॉ. संजीव कुमार शर्मा
गोरखपुर, 25 अगस्त (हि.स.)। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी, बिहार के पूर्व कुलपति डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना अत्यंत प्राचीन है। इसी चेतना और लोकतंत्र के निहित मूल्यों के बल पर भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति में एकता और अखंडता कायम है।
डॉ. शर्मा, मंगलवार को महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के पांचवें स्थापना दिवस सप्ताह समारोह के अंतर्गत आयोजित ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज एवं महंत अवेद्यनाथ जी महाराज स्मृति व्याख्यानमाला को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। व्याख्यानमाला के चौथे दिन स्वास्थ्य एवं जीवन विज्ञान संकाय की तरफ से पंचकर्म सभागार में ‘भारत : लोकतंत्र की जननी’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए मुख्य वक्ता ने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम का भाव भारतीय लोकतंत्र के मूल में शामिल है। इसी भाव के कारण विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और धर्मों के बावजूद भारत एकता के सूत्र में बंधा हुआ है।
डॉ. शर्मा ने भारत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा, विविधता में एकता, वैचारिक स्वतंत्रता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ अपने बारे में ही नहीं सोचता बल्कि विश्व मानवता उसके चिंतन के केंद्र में है। इसका प्रमाण कोविड-19 महामारी के दौरान भारत द्वारा विश्व के विभिन्न देशों को वैक्सीन एवं चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
चौथे दिन के द्वितीय व्याख्यान में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर में काय चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार सिंह ने ‘विश्वविद्यालयीन छात्रों में अकादमिक तनाव की रोकथाम एवं प्रबंधन’ विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने तनाव के कारणों, आयुर्वेदिक एवं आधुनिक दृष्टिकोण से उसके प्रबंधन, ध्यान तथा स्मार्ट गोल्स जैसी व्यावहारिक तकनीकों के माध्यम से तनाव को नियंत्रित करने के उपाय बताए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में एमजीयूजी के कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल ने विज्ञान एवं अध्यात्म के समन्वय तथा चिकित्सा शिक्षा में मानवीय मूल्यों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को तथ्यों के बजाय अवधारणात्मक ज्ञान को प्राथमिकता देने तथा चिकित्सा को मानव सेवा के रूप में समझने के लिए प्रेरित किया। वक्ताओं का स्वागत डॉ. कमलेश कुमार पाण्डेय तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नवीन कोडलाडी ने किया। इस अवसर पर आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गिरिधर वेदांतम, डॉ. एन. राजू, डॉ. दिनेश सिंह, डॉ. विजिशा, डॉ. विनम्र, डॉ. अर्पित, सहित सभी चिकित्सक, प्राध्यापक व बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।
हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय