कुशीनगर के गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, 1400 परिवार प्रभावित

 






-600 परिवारों को तटबंध पर पहुंचाया

कुशीनगर,27 सितंबर (हि.स.)। नेपाल में पिछले तीन दिनों से हो रही छिटपुट बारिश और गंडक (नरायणी) नदी में पानी छोड़े जाने से कुशीनगर जिले के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने लगी है। हरिहरपुर, मरचहवा, शिवपुर, महदेवा और सालिकपुर समेत आसपास के गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है। इससे करीब 1400 परिवार प्रभावित हुए हैं। इनमें से लगभग 600 परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर छितौनी तटबंध के पास शरण दी गई है।

रविवार को जिलाधिकारी संजय चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों की सुरक्षा और तटबंधों की निगरानी को लेकर जरूरी निर्देश दिए।

जनपद की सीमा के करीब पहुंच रहा 05 लाख एक हजार क्यूसेक पानी

जिलाधिकारी संजय चौहान ने बताया कि नेपाल में लगातार बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। रविवार रात 08 बजे तक करीब 05 लाख 01 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जो अब जनपद की सीमा के करीब पहुंच रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गांवों तक पहुंचने वाले रास्ते पूरी तरह पानी में डूब गए हैं, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

600 परिवारों को तटबंध पर पहुंचाया, भोजन और स्वास्थ्य की व्यवस्था

डीएम के मुताबिक, बाढ़ से प्रभावित करीब 1400 परिवारों में से लगभग 600 परिवारों को बाढ़ चौकी के पास तटबंध पर सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया है। वहां उनके लिए भोजन और रहने की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से हेल्थ कैंप भी लगाया गया है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पीएसी की फ्लड वाहिनी और एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई है। राजस्व, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

छितौनी तटबंध और विरभार ठोकर का निरीक्षण

जिलाधिकारी ने छितौनी तटबंध और विरभार ठोकर का निरीक्षण कर नदी के बढ़ते जलस्तर और तटबंधों की सुरक्षा की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि संवेदनशील स्थलों पर विशेष सतर्कता बरती जाए। तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जाए और कहीं भी कटान, रिसाव या क्षति दिखाई देने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

जनहानि और पशुहानि रोकने पर जोर

डीएम ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। किसी भी व्यक्ति या पशु को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से काम करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को समय से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील

नरायणी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए प्रशासन प्रभावित गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहा है। अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों के आसपास अनावश्यक रूप से नहीं जाने तथा सतर्क रहने की अपील की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक