सनातन मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए संगठित होकर आगे आए समाज : स्वामी अखिलेश्वरानंद सरस्वती
गोरखपुर, 25 जून (हि.स.)। एकादशी के पावन अवसर पर गुरुवार को भारत सेवाश्रम संघ, गोरखपुर शाखा के प्रांगण में पांच दिवसीय सत्संग समारोह का भव्य शुभारंभ हुआ। आध्यात्मिक वातावरण, भक्तिभाव और वैदिक परंपराओं के मध्य आरंभ हुए इस आयोजन में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर सत्संग का लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत सेवाश्रम संघ, गोरखपुर शाखा के अध्यक्ष स्वामी निःश्रेयसानन्द ने दीप प्रज्वलित कर किया। दीप प्रज्वलन के साथ ही पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश गूंज उठा।
सत्संग समारोह के प्रथम दिन कथा-वाचक के रूप में पधारे स्वामी अखिलेश्वरानंद सरस्वती, अध्यक्ष, शाश्वत सनातन अभ्यागत साधु समिति, हरिद्वार ने भक्तजनों को रामचरितमानस में वर्णित नवधा भक्ति का सुंदर, सरल और प्रेरणादायी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को अनुशासन, सेवा, समर्पण और सदाचार से जोड़ने का माध्यम है।
स्वामी अखिलेश्वरानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में सनातन संस्कृति की एकता, संगठन और जागरण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि समाज सनातन मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए संगठित होकर आगे आए। रामचरितमानस की शिक्षाएं व्यक्ति को न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती हैं, बल्कि समाज को जोड़ने और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती हैं।
कार्यक्रम में शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। उपस्थित प्रमुख लोगों में श्री अचिंत लहरी, आनंद मुखर्जी, स्वाति मुखर्जी, वीरू पाल, दिवाकर यादव, डॉ. हरि शरण, कु. पूर्वा मुखर्जी, आदित्य मुखर्जी, गणेश थापा, हीरेन मुखर्जी सहित अनेक श्रद्धालु एवं भक्तजन शामिल रहे।
आयोजकों ने बताया कि यह पांच दिवसीय सत्संग समारोह 29 जून 2026 तक चलेगा। प्रतिदिन सायं 6:00 बजे से 7:30 बजे तक भारत सेवाश्रम संघ के प्रांगण में सत्संग का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस आध्यात्मिक आयोजन का लाभ लेने का आग्रह किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रिंस पाण्डेय