निर्भीक पत्रकार और महान क्रांतिकारी गणेश शंकर विद्यार्थी को मिले भारत रत्न : सांसद रमेश अवस्थी
कानपुर, 27 मार्च (हि.स.)। देश के महान क्रांतिकारी, निर्भीक पत्रकार और सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन में राष्ट्र, समाज और मानवता के लिए जो त्याग और संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उनके अद्वितीय योगदान को देखते हुए राष्ट्र का सर्वोच्च सम्मान उन्हें मिलना ही चाहिए। आजादी के अमृत काल में ऐसे महान हुतात्मा को सम्मानित करना हम सभी का कर्तव्य है। यह बातें शुक्रवार को संसद में कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने कहीं।
कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने आज संसद के शून्यकाल के दौरान अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी को भारत रत्न दिए जाने की मांग उठाई। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी ने कानपुर में अपने समाचार पत्र प्रताप के माध्यम से ब्रिटिश शासन के अन्याय और अत्याचारों के खिलाफ निर्भीक आवाज उठाई।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी ने महान क्रांतिकारी भगत सिंह सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों को वैचारिक और नैतिक समर्थन दिया, जो स्वतंत्रता आंदोलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।
सांसद अवस्थी ने आगे कहा कि 25 मार्च 1931 को कानपुर में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपनी जान की परवाह किए बिना निर्दोष लोगों को बचाने का कार्य किया और इसी दौरान उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उनकी शहादत पर महात्मा गांधी ने कहा था, “काश मुझे भी ऐसी मृत्यु प्राप्त होती।”
सदन में अपनी मांग रखते हुए उन्होंने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी की शहादत स्थली का सुंदरीकरण कर वहां भव्य स्मारक और स्मृति वाटिका बनाई जाए। साथ ही ऐतिहासिक प्रताप प्रेस का जीर्णोद्धार कर उसे राष्ट्रीय पत्रकारिता संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा प्रांगण और लोकसभा परिसर में गणेश शंकर विद्यार्थी की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि देश की नई पीढ़ी उनके योगदान से प्रेरणा ले सके।
उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप