रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक प्रयोग मिट्टी और पर्यावरण के लिए घातक : डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह
कानपुर, 21 मई (हि.स.)। किसानों को संतुलित उर्वरक प्रयोग, प्राकृतिक खेती एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग को मिट्टी और पर्यावरण के लिए खतरा बताया। किसानों को जीवामृत, गोबर खाद, कम्पोस्ट एवं केंचुआ खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। यह बातें गुरुवार को डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह ने कहीं।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, जाजपुर बंजार द्वारा विकासखंड मोहम्मदाबाद के ग्राम तेरा गढ़िया में विशेष जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों को संतुलित उर्वरकों के प्रयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ खेती के विषय में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने भी सहभागिता कर किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक खेती की जानकारी दी। डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मिट्टी में जैविक कार्बन की कमी से सूक्ष्म जीव नष्ट हो रहे हैं, इसलिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण समय की आवश्यकता है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के साथ प्राकृतिक खाद, गोबर खाद, कम्पोस्ट एवं केंचुआ खाद के उपयोग पर जोर दिया। डॉ. दिव्या कौशिक ने भी किसानों को विभिन्न कृषि संबंधी जानकारियां देकर जागरूक किया।
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. देवराज मिश्रा ने दलहनी फसलों के महत्व पर जानकारी देते हुए बताया कि दलहन फसलें मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने एवं नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होती हैं। वैज्ञानिक डॉ. आशिक़ दत्ता ने मूंग की उन्नत प्रजातियों, फसल चक्र एवं अंतरवर्तीय खेती की जानकारी देते हुए बताया कि एक लाइन मक्का के साथ दो लाइन मूंग की खेती किसानों के लिए लाभकारी हो सकती है।
उन्होंने मृदा परीक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सॉइल हेल्थ कार्ड के अनुसार खेती करने से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उत्पादन में सुधार होता है। वहीं वैज्ञानिक डॉ. विश्वजीत मंडल ने किसानों को हरी खाद, जैविक कार्बन बढ़ाने, जल संरक्षण एवं कम लागत वाली खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में मृदा वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मिश्रा ने बताया कि ऊसर भूमि सुधार के लिए जिप्सम एवं जलकुंभी के प्रयोग से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, जिससे मृदा स्वास्थ्य बेहतर होता है। जागरूकता अभियान में 39 किसानों ने प्रतिभाग कर खेती से जुड़ी उपयोगी जानकारियां प्राप्त कीं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप