सूक्ष्म शिक्षण से ही शिक्षण में उत्कृष्टता संभव : डॉ तनुजा भट्ट

 


कानपुर, 18 मार्च (हि.स.)। शिक्षण में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सूक्ष्म शिक्षण की गहन समझ और उसका व्यावहारिक प्रयोग अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही प्रक्रिया शिक्षकों के कौशल को निखारती है और उन्हें प्रभावी अध्यापन के लिए तैयार करती है। यह बातें बुधवार को शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्ष एवं निदेशिका डॉ तनुजा भट्ट ने कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी के शिक्षा विभाग में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “माइक्रोटिचिंग: योर फर्स्ट स्टेप टुवर्ड्स टीचिंग एक्सीलेंस” का समापन हुआ। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में किया गया। शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ, जिसके बाद अतिथियों का स्वागत किया गया।

कार्यशाला की रूपरेखा सचिव डॉ कल्पना अग्निहोत्री ने प्रस्तुत की। विभिन्न सत्रों में विषय विशेषज्ञों ने शिक्षण के विविध आयामों पर व्याख्यान और अभ्यास कराए। विज्ञान एवं गणित पर डॉ निशात फातिमा, हिंदी पर डॉ संदीप श्रीवास्तव, सामाजिक विज्ञान पर डॉ आशा अवस्थी, वाणिज्य पर डॉ शालिनी श्रीवास्तव तथा अंग्रेजी विषय पर डॉ कंचन और अनीता वर्मा ने उपयोगी जानकारी दी।

द्वितीय सत्र में सह-निदेशक डॉ गोपाल सिंह ने कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि प्रो स्वीटी श्रीवास्तव ने सूक्ष्म शिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला, जबकि विशिष्ट वक्ता डॉ संजय श्रीवास्तव ने विस्तृत व्याख्यान दिया। संवाद और फीडबैक सत्र में लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ तनुजा भट्ट ने किया और संचालन डॉ रत्नार्तु मिश्रा ने किया। इस दौरान शिक्षक, शोधार्थी और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप