अधिक से अधिक वाद नियत कर सुलह-समझौते से निस्तारण कराएं : रश्मि सिंह

 


कानपुर, 02 सितंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक वाद नियत किए जाएं, ताकि सुलह-समझौते के आधार पर ज्यादा से ज्यादा मामलों का त्वरित निस्तारण कराया जा सके। यह बातें बुधवार को राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत रश्मि सिंह ने कही।

आगामी 12 सितंबर को दीवानी न्यायालय परिसर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर बुधवार काे जनपद न्यायालय के प्रथम तल स्थित मीटिंग हॉल में बैठक हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों और बैंक पदाधिकारियों के साथ लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों को नियत करने और उनका प्रभावी ढंग से निस्तारण कराने पर चर्चा की गई।

बैठक में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं नोडल अधिकारी मध्यस्थता-3.0 सुभाष सिंह, एडीएम (जे) बिन्दु लता, एडीएम सिटी एवं नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत (प्रशासन) आलोक गुप्ता, एडिशनल डीसीपी एवं नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत (पुलिस विभाग) स्नेहा तिवारी, अग्रणी जिला प्रबंधक एवं लीड बैंक प्रबंधक आदित्य चन्द्रा तथा विभिन्न बैंकों के पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कानपुर नगर अभिनव तिवारी ने अधिकारियों और बैंक पदाधिकारियों से अधिक से अधिक वाद लोक अदालत के लिए नियत करने को कहा। उन्होंने कहा कि जब तक नियत वादों की संख्या में वृद्धि नहीं होगी, तब तक निस्तारण की संख्या बढ़ाना संभव नहीं होगा। उन्होंने छोटी-छोटी समस्याओं और विवादों का भी सुलह-समझौते के माध्यम से त्वरित समाधान कराने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय लोक अदालत में मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, सिविल वाद, पारिवारिक वाद, बैंक ऋण वसूली के मामले, एनआई एक्ट से संबंधित वाद और राजस्व संबंधी मामलों समेत ऐसे प्रकरणों का निस्तारण कराया जाएगा, जिनमें सुलह-समझौते के आधार पर विवाद समाप्त किया जा सकता है।

बैठक में बैंक अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि शाखाओं में आने वाले ग्राहकों को राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी दी जाए और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। ऐसे मामलों को चिह्नित करने को कहा गया, जिनमें पक्षकारों की सहमति और उचित शर्तों के आधार पर विवाद का समाधान संभव है। बैंक, पुलिस और प्रशासन के स्तर से संबंधित पक्षकारों को समय से नोटिस उपलब्ध कराने और उन्हें लोक अदालत में उपस्थित होकर मामलों के निस्तारण के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया।

अधिकारियों ने कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की अपेक्षाओं के अनुरूप अधिक से अधिक पात्र पक्षकारों को लोक अदालत का लाभ दिलाया जाए। इसके लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, जिससे लंबित मामलों का त्वरित और प्रभावी ढंग से निस्तारण कराया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप