झंडा गीत को फिर पाठ्यक्रम में शामिल कराने का प्रयास होगा: रमेश अवस्थी

 




कानपुर, 16 सितंबर (हि.स.)। झंडा गीत को दोबारा स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही कानपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक और नौ पर राष्ट्रकवि पद्मश्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ की जीवनी और झंडा गीत लिखवाने के लिए रेल मंत्री को पत्र भेजा गया है। ये बातें सांसद रमेश अवस्थी ने बुधवार को फूलबाग प्रांगण में झंडा गीत शिलापट के लोकार्पण के दौरान कहीं।

पद्मश्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ स्मृति संस्थान और उत्तर प्रदेश नागरिक मंच के संयुक्त तत्वावधान में 150 फीट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज के नीचे शिलापट का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में नगर के जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। शिलापट पर झंडा गीत के साथ पार्षद जी की जीवनी की झलक भी अंकित की गई है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने झंडा गीत को फिर से स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की मांग भी उठाई।

सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि पार्षद की इच्छाशक्ति बेहद मजबूत थी। उन्होंने लोकसभा में निजी विधेयक के माध्यम से झंडा गीत को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिलाने का प्रयास किया है। इसमें संस्था के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने ही इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए, जिन्हें लोकसभा में रखा गया। सांसद ने कहा कि इससे झंडा गीत को सम्मान मिलने के साथ कानपुर का गौरव भी बढ़ेगा।

उन्होंने बताया कि झंडा गीत 3-4 मार्च 1924 को रचा गया था और 13 अप्रैल 1924 को जलियांवाला बाग दिवस के अवसर पर फूलबाग, कानपुर में पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में पहली बार सार्वजनिक रूप से सामूहिक रूप से गाया गया था। इसलिए फूलबाग से इस गीत का ऐतिहासिक जुड़ाव है। सांसद ने कहा कि स्टेशन के दोनों प्लेटफार्मों पर पार्षद जी की जीवनी और गीत अंकित होने से यात्रियों को भी उनके योगदान की जानकारी मिल सकेगी।

विधायका नीलिमा कटियार ने कहा कि झंडा गीत ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गीत सुनकर लोगों में देशभक्ति और उत्साह का संचार होता था। विशिष्ट अतिथि दीपक मालवीय और जगदंबा भाई ने पार्षद से जुड़े कई प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि पार्षद जी ने सेवा आश्रम की स्थापना कर खादी और ग्रामोद्योग का काम शुरू किया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था और यह स्थान स्वतंत्रता आंदोलन का भी प्रमुख केंद्र बना।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग महासंघ एवं पद्मश्री श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ स्मृति संस्थान के अध्यक्ष सुरेश गुप्ता ने की। इस अवसर पर अनीता गुप्ता, विकास जायसवाल, विनोद गुप्ता, मदन मोहन शुक्ला, विश्वनाथ कनोडिया, शेषनारायण त्रिवेदी, सुरेंद्र अवस्थी, अभिषेक गुप्ता, मोनू पार्षद, आलोक पांडेय, सत्येंद्र सिन्हा, मोहम्मद उस्मान, रामप्रकाश पाल, विपिन यादव, रमाशंकर अग्रहरि, दीपक शुक्ला, योगेश पांडेय, पीयूष यादव, प्रदीप गुप्ता, सौरभ गुप्ता और अमर गुप्ता समेत कई लोग मौजूद रहे। सांसद ने पार्षद जी के परिजनों और अन्य लोगों को अंगवस्त्र व माला पहनाकर सम्मानित किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप