मुरादाबाद की सरिता रानी ने सौर ऊर्जा से मिली बचत को जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा का सहारा बनाया

 


- पीएम सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना से सरिता रानी ने अपनाई ऊर्जा आत्मनिर्भरता

मुरादाबाद, 09 सितम्बर (हि.स.)। प्रधानमंत्री के ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों के जीवन में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की नई मिसालें भी कायम की हैं। मुरादाबाद की सरिता रानी ऐसी ही प्रेरक लाभार्थी हैं, जिन्होंने सौर ऊर्जा को अपनाकर न केवल अपने परिवार के बिजली खर्च में कमी की, बल्कि बचत की राशि से जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा में सहयोग का सराहनीय कार्य भी शुरू किया है।

सरिता रानी मुरादाबाद के एक निजी विद्यालय की प्रधानाचार्या हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण के मार्गदर्शन में अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया। योजना के अंतर्गत उन्हें 1,08,000 रुपये की सरकारी सब्सिडी प्राप्त हुई, जिससे सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना उनके लिए अधिक किफायती हुआ।

सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होने के बाद उनके परिवार को बिजली के खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली और हर माह लगभग ₹4,000 से 4,500 रुपये तक की बचत होने लगी। यह बचत अब उनके लिए केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि समाज के जरूरतमंद बच्चों की मदद का माध्यम भी बन गई है। सरिता रानी ने कहा कि “सूर्य को अपने परिवार का कमाई करने वाला सदस्य बनाइए और सौर ऊर्जा से होने वाली बचत का उपयोग बच्चों की बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए कीजिए।”

सरिता रानी की यह पहल बताती है कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ आर्थिक बचत और सामाजिक उत्थान का भी प्रभावी माध्यम बन रही है। स्वच्छ ऊर्जा से प्राप्त आर्थिक लाभ को शिक्षा के क्षेत्र में लगाकर उन्होंने योजना को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

बिजली बिल की बचत से बच्चों की पढ़ाई में मदद

ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी सरिता रानी ने महसूस किया कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के कई बच्चे किताबें, यूनिफॉर्म और विद्यालयी शुल्क का खर्च वहन करने में कठिनाई महसूस करते हैं। ऐसे में उन्होंने सौर ऊर्जा से होने वाली बचत का एक हिस्सा गरीब एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों की शिक्षा पर खर्च करने का निर्णय लिया। अब बिजली के बिल में जाने वाली राशि का उपयोग जरूरतमंद बच्चों के लिए पाठ्य-पुस्तकें एवं यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने तथा शिक्षण शुल्क में सहयोग देने में किया जा रहा है।

अभिभावकों और विद्यार्थियों को भी कर रहीं जागरूक

सरिता रानी अपने घर में स्थापित सोलर सिस्टम को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए विद्यालय के अभिभावक-शिक्षक सम्मेलनों और प्रार्थना सभाओं के माध्यम से विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को सौर ऊर्जा के लाभों के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनका कहना है कि सौर ऊर्जा को केवल बिजली बचाने का साधन न समझकर भविष्य के लिए एक उपयोगी निवेश के रूप में अपनाया जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / निमित कुमार जायसवाल