विकास के मूल आधार में शिक्षा, मूल्य और कर्तव्यबोध भी जरूरी : डॉ. अतुल कोठारी

 


कानपुर, 19 सितंबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश का विकास देश के विकास से जुड़ा है और विकास का मूल आधार शिक्षा है। शिक्षा केवल आर्थिक और भौतिक प्रगति तक सीमित न रहकर मूल्यों, नैतिकता, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी साथ लेकर चले, तभी विकसित समाज की कल्पना साकार होगी। यह बातें शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने शनिवार को छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश ज्ञान सभा के उद्घाटन सत्र में कहीं।

विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में ज्ञान सभा का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की। डॉ. अतुल कोठारी और न्यास के राष्ट्रीय सहसंयोजक संजय स्वामी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

राजेश त्रिवेदी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री और रोजगार नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, विवेक, कौशल, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करना भी है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास, मातृभाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

संजय स्वामी ने न्यास की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2004 में शुरू हुई पहल के बाद 2007 में न्यास का गठन हुआ। उन्होंने कहा कि छह विषयों से शुरू हुआ कार्य अब 19 विषयों और विभिन्न शैक्षणिक आयामों तक पहुंच चुका है।

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि शिक्षक अपने आचरण से विद्यार्थियों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करें। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि एआई के दौर में शिक्षक की भूमिका केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रह सकती। संवाद, विवेक और आत्मचिंतन शिक्षा के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

दूसरे सत्र में गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय ज्ञान परंपरा और एआई पर चर्चा हुई। आईआईटी कानपुर के प्रो. अर्नब भट्टाचार्य मुख्य अतिथि रहे। वक्ताओं ने कहा कि एआई सूचना उपलब्ध करा सकता है, लेकिन ज्ञान को प्रज्ञा में बदलने के लिए मानवीय चिंतन, अनुभव, विवेक और नैतिकता जरूरी है।

तीसरे सत्र में उच्च शिक्षा और उत्तर प्रदेश के विकास पर चर्चा हुई। पीपीएन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनूप कुमार ने उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने, दूरस्थ क्षेत्रों में नए संस्थान खोलने, कौशल विकास और डिजिटल सुविधाओं के विस्तार की जरूरत बताई।

अंतिम सत्र में आईआईटी कानपुर के प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी ने एआई, तकनीकी शिक्षा, पर्यावरण और टिकाऊ शहरों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि एआई से प्रदूषण, बाढ़ और यातायात जैसी समस्याओं का पूर्वानुमान लगाकर बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं। एचबीटीयू के कुलपति प्रो. शमशेर सिंह ने शिक्षा की गुणवत्ता और अच्छे शिक्षकों की भूमिका पर जोर दिया। कार्यक्रम में शिक्षक, प्रशिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप